धर्मांतरण के विरोध में नारायणपुर में प्रदर्शन, जनजातीय समाज ने उठाई मांगें
नारायणपुर| छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरंडा में कथित धर्मांतरण और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। इस विषय को लेकर स्थानीय जनजातीय समाज, ग्राम सभा के प्रतिनिधियों और विभिन्न पारंपरिक सामाजिक संगठनों ने बड़ी संख्या में लामबंद होकर उग्र प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन पर इस संवेदनशील मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने और निष्क्रियता का सीधा आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के कई दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा जांच की वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं की गई है और न ही धरातल पर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी आक्रोश के तहत समाज प्रमुखों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र (ज्ञापन) भी प्रेषित किया है।
आस्था और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, बाजार पारा में प्रदर्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर के बाजार पारा क्षेत्र में आज जनजातीय समुदाय के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीते 9 जून को स्थानीय पुलिस थाने में एक आधिकारिक शिकायत सौंपी गई थी। इस शिकायत में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि कुछ बाहरी व स्थानीय तत्वों द्वारा जनजातीय समाज की प्राचीन धार्मिक आस्था, लोक देवी-देवताओं और पारंपरिक मान्यताओं के विरुद्ध बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं, साथ ही भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए उकसाया जा रहा है। समाज का कहना है कि एफआईआर के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पूरे अंचल के आदिवासियों में गहरा रोष व्याप्त है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग
आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
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समयबद्ध जांच: पूरे प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर जांच कराई जाए।
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कठोर कानूनी कार्रवाई: यदि जांच में धर्मांतरण और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषियों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई हो।
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गतिविधियों पर निगरानी: नारायणपुर जिले के अंदरूनी और वनांचल क्षेत्रों में संचालित हो रही इस तरह की अन्य संदिग्ध गतिविधियों की भी व्यापक स्क्रूटनी (जांच) की जाए।
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पारदर्शिता: स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा इस मामले में अब तक की गई प्रोग्रेस रिपोर्ट को आम जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।
सांस्कृतिक पहचान पर संकट: समाज प्रमुखों की चेतावनी
जनजातीय समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यह पूरा विवाद सिर्फ एक सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि यह उनकी सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, मूल सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों को नष्ट करने का एक सुनियोजित प्रयास है। इसलिए, कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले शासन को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर कड़े कदम उठाने चाहिए। फिलहाल, इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर पूरे बस्तर संभाग और नारायणपुर जिले में तनावपूर्ण शांति है और हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या रुख अख्तियार करता है।

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