बोड़ला में निःशुल्क सोनोग्राफी एवं रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन
रायपुर : उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के निर्देशानुसार कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क सोनोग्राफी एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर विशेष रूप से वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित रहती है।
शिविर के दौरान कुल 91 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी जांच की गई, जिससे हाई रिस्क गर्भावस्था की समय रहते पहचान हो सकी। चिकित्सकों द्वारा प्रसव पूर्व देखभाल, पोषण, एनीमिया की रोकथाम एवं संस्थागत प्रसव के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। बोड़ला, चिल्फी, रेंगाखार, तरेगांव, झलमला सहित वन क्षेत्रों की महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
इस शिविर में 146 ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच भी की गई। जिसमें उन्हें निःशुल्क दवाइयाँ, परामर्श एवं आवश्यक उपचार सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। वहीं रक्तदान शिविर में 6 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान से दुर्घटना, प्रसव एवं शल्य चिकित्सा के दौरान जीवन रक्षा संभव होती है तथा गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों को सहारा मिलता है। इस शिविर से बोड़ला सेक्टर के मंडलटोला, खरिया, बैरक, बोड़ला; पोड़ी सेक्टर के रामहेपुर, सारंगपुरकला, कुसुमघटा, पोड़ी; बैजलपुर सेक्टर के खंडसरा, भलपरी, मढ़ाडाबरी, मड़मढ़ा, बैजलपुर आदि ग्रामों के ग्रामीण लाभान्वित हुए।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचें। ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को और अधिक मजबूत किया जा सके। समग्र रूप से यह शिविर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी रहा। ग्रामीणों ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के इस प्रयास के लिए आभार व्यक्त किया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र तूरे ने बताया कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश और कलेक्टर गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में इस प्रकार के शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे है। जिससे अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच सुनिश्चित हो सके। वहीं बीएमओ डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत ने कहा कि सोनोग्राफी द्वारा हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान जल्दी हो जाती है, जो वनांचल क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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