पुल निर्माण में लापरवाही का आरोप, गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
मुरैना । क्षेत्र के अंतर्गत क्वारी और आसन नदी के पवित्र त्रिवेणी संगम तट पर बसे ग्राम तरसमां में बनाए जा रहे नए पुल के निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप प्रकाश में आए हैं। क्षेत्र के बाशिंदों और ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस पुल के निर्माण में तयशुदा गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही है। विशेषकर पुल के मुख्य खंभों (पिलर) की भराई के अहम काम में बेहद घटिया, दोयम दर्जे की और मिट्टी के मिश्रण वाली बजरी (रेत) का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रशासनिक कोताही के सामने आने के बाद से ही समूचे ग्रामीण आंचल के लोगों में निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है।
घटिया सामग्री के उपयोग से मजबूती पर सवाल और जनता की सुरक्षा को खतरा
ग्रामीणों ने बेहद मुखर होकर आरोप जड़ा है कि संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा सरकारी दिशा-निर्देशों और तय मानकों के ठीक विपरीत जाकर अत्यंत निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इस लापरवाही के कारण निर्माणाधीन पुल की दीर्घकालिक मजबूती, टिकाऊपन और बुनियादी गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि लोक निर्माण विभाग और प्रशासनिक आला अधिकारियों द्वारा समय रहते इस पूरे कार्य की तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में यह पुल कभी भी भरभरा कर गिर सकता है और आम जनता की जान-माल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और परोक्ष खतरा साबित हो सकता है।
रात के अंधेरे में बजरी का अवैध उत्खनन और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
भ्रष्टाचार के इन आरोपों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती; ग्रामीणों ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे रात के सन्नाटे में नदियों के तटों से बजरी का अवैध रूप से उत्खनन (माइनिंग) और अवैध परिवहन किया जा रहा है। इस गैरकानूनी कृत्य को उजागर करने के लिए कुछ जागरूक ग्रामीणों ने मौके पर जाकर बकायदा इसके वीडियो साक्ष्य तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर प्रसारित (वायरल) कर दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद से ही क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग और सरकारी खजाने के दुरुपयोग पर रोक
स्थानीय जनता और समाजसेवियों का पुरजोर कहना है कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से आकार ले रही इस महत्वाकांक्षी पुल परियोजना की किसी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से सघन जांच कराई जानी बेहद जरूरी है। इससे न केवल निर्माण कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी, बल्कि सरकारी धन के इस खुले दुरुपयोग और बंदरबांट पर भी प्रभावी रूप से लगाम कसी जा सकेगी। हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर अभी तक संबंधित निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों या प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या पुष्टि सामने नहीं आई है; अब हर किसी की नजरें प्रशासनिक जांच शुरू होने और उसकी वास्तविक रिपोर्ट आने पर ही टिकी हुई हैं।

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