- एजेंडा तय करने में राय नहीं लिए जाने और स्ट्रीट लाइट को लेकर जमकर मचाया हंगामा 
- सब इंजीनियर जतिन पाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित, एक सप्ताह में दुरूस्त होगी व्यवस्था 
- नेता प्रतिपक्ष बोले- कौन चला रहा नगर पालिका, बिना राय लिए कैसे बन गया सम्मेलन का एजेंडा 

Betul Municipal Council Meeting: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। एजेंडा तय करने में राय नहीं लेने से गुस्साए पार्षदों ने 5 महीने बाद हो रहे सम्मेलन में जमकर हंगामा मचाया। इसके अलावा सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किए गए कुछ प्रस्तावों का भी पार्षदों ने खासा विरोध जताया। इन सभी के चलते सम्मेलन को ही स्थगित करना पड़ा। इससे पहले सब इंजीनियर जतिन पाल के विरूद्ध निंदा प्रस्ताव पास किया गया। अब पार्षदों की राय के आधार पर एजेंडा तय कर जल्द ही नई तिथि पर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। 

नगर पालिका अध्यक्ष पार्वतीबाई बारस्कर की अध्यक्षता और उपाध्यक्ष महेश राठौर, पूर्व नपाध्यक्ष और पार्षद आनंद प्रजापति, सीएमओ सतीश मटसेनिया, सभी पार्षदों एवं नपा के अधिकारियों की उपस्थिति में बाल मंदिर स्थित सभा कक्ष में आज दोपहर नपा का सम्मेलन प्रारंभ हुआ। सम्मेलन के शुरू होते ही अपनी अनदेखी किए जाने को लेकर कई पार्षदों ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। केवल विपक्षी ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के कई पार्षदों ने भी एजेंडा तय किए जाने में उनकी राय नहीं लिए जाने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान ने साफ कहा कि 'नगर पालिका चला कौन रहा है। बिना किसी की सहमति लिए एजेंडा कैसे तय कर लिया गया। यदि किसी की राय ही नहीं ली तो फिर इस बैठक का ही क्या औचित्य?' अन्य कई पार्षदों ने भी इस मुद्दे को लेकर विरोध जताया और हंगामा किया। इसके चलते सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। नपा सीएमओ सतीश मटसेनिया ने बताया कि सम्मेलन स्थगित कर दिया गया है। आगामी तारीख जल्द ही तय की जाएगी। 

स्ट्रीट लाइट को लेकर एक घंटा बहस

सम्मेलन के दौरान पार्षदों ने सबसे ज्यादा हंगामा स्ट्रीट लाइट को लेकर किया। उनका कहना था कि 6-6 महीने तक सुधार नहीं हो रहा है। कहीं लाइट बदलते ही फिर खराब हो जा रहे हैं। पार्षद ममता मालवी ने कहा कि अतिक्रमण छोड़िए, पहले स्ट्रीट लाइट पर ध्यान दीजिए। पार्षद अब्दुल नफीस ने भी कहा कि 15-15 दिनों में भी लाइट नहीं सुधर रही। इस बीच सब इंजीनियर अमित सक्सेना ने शहर में 27 हजार पोल की बात कही तो उपाध्यक्ष महेश राठौर बोले कि इतने पोल निकल गए तो मैं पद इस्तीफा दे दूंगा। इधर पार्षदों के विरोध को देखते हुए सब इंजीनियर जतिन पाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। वहीं एक सप्ताह में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को पूरी तरह से दुरूस्त करने के निर्देश भी दिए गए। 

कार्यों की गुणवत्ता पर उठाए सवाल 

सम्मेलन के दौरान पार्षदों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इंजीनियर मौके पर जाकर देखते ही नहीं और कमीशन लेकर भुगतान कर देते हैं। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता खराब नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह बात भी कही कि अवैध कॉलोनियों में कोई कार्य नहीं कराए जाएं। कई पार्षदों ने अपने वार्डों में काम ही नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। गर्मी में जल संकट से निपटने अभी से प्लानिंग करने की जरुरत भी जताई गई। 

आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा गरमाया 

सम्मेलन के दौरान आउटसोर्स पर रखे कर्मचारियों का मुद्दा भी गरमाया। पार्षदों का कहना है कि वित्तीय स्थिति खराब है तो इतने कर्मचारी रखने की क्या जरुरत। कौन कर्मचारी कहां है, क्या कर रहे हैं, यह किसी को पता ही नहीं। पार्षदों ने नगर पालिका के कर्मचारियों को वेतन में लेटलतीफी का मुद्दा भी उठाया। पार्षद नंदिनी तिवारी ने हमलापुर में लीकेज के कारण गंदे पानी की सप्लाई का मुद्दा उठाया, जिस पर सीएमओ ने तुरंत सुधार के निर्देश दिए। 

उपभोक्ता प्रभार बढ़ाने का भी विरोध 

पार्षदों ने उपभोक्ता प्रभार में बढ़ोतरी किए जाने के प्रस्ताव का भी विरोध जताया। इसे मासिक 20 रुपये से 100 रुपये किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। नेता प्रतिपक्ष राजकुमार दीवान और पार्षद संतोष भलावी ने एमराल्ड हाइट्स को उनके पास उपलब्ध जमीन से अधिक पर अनुज्ञा दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे नगर पालिका को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इस पर एक बार फिर से जांच करा लिए जाने की बात अधिकारियों ने कही। गौरतलब है कि सम्मेलन में कुल 33 विषयों पर विचार कर निर्णय लिए जाने थे। सम्मेलन स्थगित हो जाने से किसी भी विषय पर निर्णय नहीं लिया जा सका।