Betul Collectorate Promotion: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक केंद्र कलेक्ट्रेट कुछ दिन पहले लिपिकों की कमी से जूझ रहा था। अब पदोन्नतियां होने के बाद बाबुओं की स्थिति तो ठीक हुई है, लेकिन भृत्यों के पद थोक में खाली हो गए हैं। हालांकि इससे अब अनुकंपा नियुक्तियां जल्द मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा नई भर्ती की भी जरुरत महसूस की जा रही है। 

जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश भर में लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं हो पा रही थी। यही कारण है कि कर्मचारियों को जहां पदोन्नति का इंतजार था, वहीं लगभग सभी विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे थे। बैतूल कलेक्ट्रेट भी इससे अछूता नहीं रह गया था। कुछ समय पहले कलेक्ट्रेट में सहायक ग्रेड-2 की सबसे ज्यादा कमी थी। सहायक ग्रेड-2 के पद तो 43 स्वीकृत थे, लेकिन पदस्थ बेहद कम थे। इससे कामकाज पर खासा असर पड़ रहा था। इस पद पर पदस्थ कर्मचारी एक-एक कर सेवानिवृत्त तो हो रहे थे, लेकिन उनके स्थान पर दूसरे कर्मचारी बिल्कुल नहीं आ रहे थे। 

पदोन्नति से सुधर गई पूरी स्थिति 

इसी कमी को हाल ही में हुई पदोन्नति की प्रक्रिया ने सुधार दिया है। कलेक्ट्रेट में पदस्थ 31 सहायक ग्रेड-3 को इस बार पदोन्नत कर सहायक ग्रेड-2 बनाया गया है। इससे सीधे-सीधे 31 सहायक ग्रेड-2 कलेक्ट्रेट को मिल गए हैं। अब कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले 2-3 ही पद इस इस संवर्ग में रह गए हैं। इससे अब कामकाज ज्यादा प्रभावित नहीं होगा। हालांकि कर्मचारियों का यह कहना भी है कि यह स्वीकृत पद कई सालों पहले के हैं और अब कामकाज बढ़ जाने से पदों को भी बढ़ाने की सख्त जरुरत है। 

ग्रेड-3 में गए ज्यादा और आए कम 

इसी तरह सहायक ग्रेड-3 को पदोन्नति से थोड़ा नुकसान हुआ है। पूर्व में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 में से पदोन्नति तो 31 की हो गई, लेकिन भृत्य से सहायक ग्रेड-3 के रूप में 19 ही पदोन्नत हुए हैं। इस वर्ग के कुल 101 पद स्वीकृत हैं, लेकिन जितने कर्मचारी गए हैं, उससे कम पदोन्नत होने के कारण अब इस वर्ग में 12 पद खाली हो गए हैं। इससे वर्तमान में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों पर कार्य का बोझ थोड़ा बढ़ जाएगा। 

भृत्यों की हो गई अब खासी कमी 

पदोन्नति से सबसे ज्यादा प्रभावित भृत्य के पद हुए हैं। पूर्व में भृत्य के पद पर कार्य कर रहे 19 कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के रूप में और 10 को जमादार, दफ्तरी और बस्ता बरदार के पद पर पदोन्नत किया गया है। दूसरी ओर भृत्य के पद कोई पदोन्नति नहीं होती। इससे यह 29 पद और खाली हो गए हैं। 

पहले से ही खाली थे 45 पद 

बताया जाता है कि कलेक्ट्रेट में भृत्य के कुल 137 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 45 पद पहले से ही खाली पड़े थे। अब 29 पद और खाली हो गए हैं। इस तरह से कुल 74 पद अब भृत्यों के खाली पड़े हैं। इस तरह अब मात्र 65 कर्मचारी ही भृत्य के पद पर कार्यरत है। हालत यह है कि जितने कर्मचारी पदस्थ हैं, उससे ज्यादा पद रिक्त हैं। इस तरह पदोन्नति का सबसे ज्यादा असर भृत्य पद पर पड़ा है। इन हालातों में वर्तमान में जो कर्मचारी इस पद पर कार्यरत हैं, उन पर काम का बोझ खासा बढ़ गया है। 

तेजी से मिल सकेगी अनुकंपा नियुक्ति 

अब भृत्य के पद और खाली होने पर अब अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से हो सकेगी, हालांकि अनुकंपा नियुक्ति में भी इस पद के लिए ज्यादा युवा रूचि नहीं दिखाते हैं। इसलिए अनुकंपा नियुक्ति से भी भृत्य के पदों की ज्यादा भरपाई होने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। ऐसे में नई भर्ती होने पर ही कर्मचारियों की कमी दूर होने की संभावना है।