Betul Rain News: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई रिमझिम बारिश से खरीफ फसलों को नई संजीवनी मिली है। सोयाबीन, मक्का, तुअर और मूंगफली की फसलों के लिए यह वर्षा अमृत समान साबित हो रही है। हालांकि धान और गन्ने की खेती करने वाले किसान अब भी सावन की झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इन फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए लगातार और पर्याप्त वर्षा आवश्यक है।

इस वर्ष बैतूल जिले में मक्का की अपेक्षा सोयाबीन का रकबा बढ़ा है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष मक्का के उचित दाम नहीं मिलने से उन्होंने इस बार महंगा बीज खरीदकर अधिक मात्रा में सोयाबीन की बोवनी की है। ऐसे में अब उनकी पूरी उम्मीद सावन की अच्छी बारिश पर टिकी है। किसानों का मानना है कि यदि सावन में अच्छी वर्षा होती है तो नदी-तालाब भरेंगे, भूजल स्तर में सुधार होगा और ट्यूबवेल रिचार्ज होने से आगामी रबी सीजन में गेहूं, चना जैसी फसलों को भी पर्याप्त सिंचाई मिल सकेगी। 

तो फसलों पर यह पड़ेगा प्रभाव 

यदि भारी वर्षा सावन के बाद होती है तो फसलों में सड़न और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। कम बारिश से गन्ने के उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग द्वारा पहले ही कम वर्षा की संभावना जताए जाने के कारण इस वर्ष क्षेत्र में धान का रकबा भी घटा है। धान की फसल को पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए धान उत्पादक किसान अच्छी बारिश की राह देख रहे हैं।

संतुलित वर्षा से होगी अच्छी पैदावार 

किसानों की निगाहें अब सावन की झड़ी पर टिकी हैं। समय पर और संतुलित वर्षा ही इस वर्ष खरीफ की अच्छी पैदावार और आने वाले रबी सीजन की मजबूत नींव तय करेगी। मलकापुर के उन्नत कृषक आशीष वर्मा ने बताया कि वर्तमान की रिमझिम बारिश से फसलों को लाभ मिल रहा है, लेकिन वातावरण में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण आने वाले दिनों में वायरस जनित रोगों और कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

गन्ने की फसल हो सकती है प्रभावित

रतनपुर के उन्नत कृषक किसान सीताराम मालवी का कहना है कि बैतूल क्षेत्र में शुगर मिल शुरू होने के बाद गन्ने का रकबा बढ़ा है, लेकिन अब तक पर्याप्त वर्षा नहीं होने से गन्ने की फसल प्रभावित होने और उत्पादन घटने की चिंता किसानों को सता रही है।