Betul Nagar Nigam: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल नगर पालिका को नगर निगम बनाए जाने की कवायद प्रशासनिक स्तर पर जारी है। नगर निगम में 29 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाना है। इनमें से 5 ग्राम पंचायतों ने नगर निगम में शामिल होने से इंकार कर दिया है। ऐसे में अब इन पंचायतों में असहमति प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने के लिए दोबारा ग्राम सभा का आयोजन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार प्रस्ताव पारित करवाने का जिम्मा शिक्षकों को सौंपा गया है। 

उल्लेखनीय है कि बैतूल नगर निगम में 29 ग्राम पंचायतों और बैतूल बाजार नगर परिषद को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। बैतूल नगर परिषद और अन्य 24 ग्राम पंचायतों ने तो अपनी सहमति व्यक्त कर दी है, लेकिन यह ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिन्होंने असहमति प्रस्ताव पारित किया है। इन सभी पंचायतों में इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 10 जुलाई को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया था। समस्या यह है कि जब तक इन ग्राम पंचायतों में यह प्रस्ताव पारित नहीं होता और ग्राम सभाओं द्वारा नगर निगम में शामिल होने की सहमति व्यक्त नहीं की जाती, तब तक इन ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर इन ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया जाता है तो फिर नगर निगम के लिए तय न्यूनतम आबादी का पेंच फंस सकता है। 

इन ग्राम पंचायतों ने किया इंकार 

बैतूल नगर निगम में शामिल होने से जिन ग्राम पंचायतों ने इंकार कर दिया है, उनमें टेमनी, खेड़ला, रोंढा, खंडारा और जैतापुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के ग्रामीणों ने स्वयं भी कलेक्ट्रेट और एसडीएम ऑफिस पहुंच कर अपनी आपत्ति जताई थी और उनकी पंचायत को नगर निगम में शामिल नहीं किए जाने की मांग की थी। 

इसलिए दोबारा होगी ग्राम सभाएं 

यही कारण है कि अब प्रशासन द्वारा दोबारा इन ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्राम सभा से पारित अभिमत प्राप्त कर प्रस्ताव सहित भेजने को कहा है। एसडीएम अभिजीत सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इन ग्राम सभाओं के लिए शिक्षकों और सहायक शिक्षकों को नोडल अधिकारी बनाया है। टेमनी के लिए शिवदयाल वामनकर, खेड़ला के लिए सदाशिव देशमुख, रोंढा के लिए सुभाष खातरकर, खंडारा के लिए रीमा लोनारे और जैतापुर के लिए संजय सुजाने को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 

भोगीतेढ़ा से आई थी पहली आपत्ति 

गौरतलब है कि नगर निगम में शामिल होने के खिलाफ सबसे पहले भोगीतेढ़ा के ग्रामीणों ने मांग उठाई थी। सबसे पहले वे ही कलेक्ट्रेट और एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। उनके द्वारा मांग उठाए जाने के बाद ही अन्य पंचायतों को भी इस बारे में जानकारी मिली और वहां के ग्रामीण भी जिला मुख्यालय पहुंच कर अपनी आपत्ति दर्ज कराने लगे। हालांकि असहमति जताने वाली इन 5 ग्राम पंचायतों में भोगीतेढ़ा का नाम शामिल नहीं है। 

ग्रामीण इन कारणों से कर रहे विरोध 

जिन ग्राम पंचायतों से नगर निगम में शामिल होने से इंकार किया जा रहा है, वहां के ग्रामीणों का कहना है कि इससे उन्हें कई तरह के नुकसान उठाने होंगे। उनका कहना है कि सबसे बड़ा असर यह होगा कि उनका रोजगार ही समाप्त हो जाएगा। निगम बनने के बाद जीरामजी योजना लागू नहीं होगी, जिससे उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा। इसके अलावा कई तरह के टैक्स देने होंगे। वहीं मकान बनाने के लिए भी कई तरह की अनुमतियां लगेंगी। जमीन की खरीदी-बिक्री में भी कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसके अलावा कई योजनाओं से भी वंचित होना होगा। इससे उनका जीवन बेहद मुश्किलों से भरा हो जाएगा। 

परिसंपत्तियों की भी जुटाई जा रही जानकारी 

इधर बैतूल को नगर निगम बनाए जाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बेहद तेजी से काम चल रहा है। पहले चरण में जहां पंचायतों से वहां कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी बुलाई गई थी, वहीं अब पंचायतों में उपलब्ध शासकीय परिसंपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यही नहीं बैतूल नगर पालिका और बैतूल बाजार नगर परिषद की भी परिसंपत्तियों की जानकारी मांगी गई है। नगर पालिका बैतूल ने इसके लिए सभी शाखाओं से तत्काल जानकारी भेजने को कहा है, ताकि उसे उच्चाधिकारियों को भिजवाई जा सके।