नई दिल्ली: मशहूर अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन अपने लोकप्रिय टॉक शो 'शेखर टूनाइट' के एक हालिया एपिसोड के दौरान उस वक्त बेहद भावुक हो गए जब उन्होंने देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठा रहे बेकसूर छात्रों पर जिस तरह से लाठियां बरसाई गईं और उनके लहूलुहान दृश्यों ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। 63 वर्षीय शेखर सुमन ने कहा कि इस अमानवीय घटना के बाद से वे पिछले तीन दिनों से सो नहीं सके हैं और लगातार फफक-फफक कर रो रहे हैं।

विरोध प्रदर्शन और छात्रों के समर्थन पर शेखर सुमन की बात

नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में धांधली जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर चल रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर खुलकर बात करते हुए सुमन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे पूरी तरह से इन युवाओं और छात्रों के साथ खड़े हैं।

  • उन्होंने पुलिस और प्रशासन द्वारा छात्रों के खिलाफ की गई दमनकारी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।

  • उन्होंने यह भी साझा किया कि शुरू में उनके मन में यह असमंजस था कि क्या ऐसे तनावपूर्ण और संवेदनशील समय में जब पूरा देश छात्रों के आंदोलनों की वजह से उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, तब इस तरह के शो का प्रसारण किया जाना चाहिए या नहीं। लेकिन बाद में उन्होंने यह महसूस किया कि एक जिम्मेदार नागरिक और कलाकार के रूप में अपनी बात रखना उनका कर्तव्य है।

भावुक अंदाज में बयां किया दर्द

शो की शुरुआत बेहद भावुक और गमगीन माहौल में करते हुए शेखर सुमन ने कहा, 'गत 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन मासूम, निहत्थे और पूरी तरह बेबस बच्चों के साथ जो कुछ भी हुआ, वह कलेजा चीर देने वाला था। जिस बेरहमी, क्रूरता और अमानवीय तरीके से उन्हें लाठियों से पीटा गया और लहूलुहान कर दिया गया, उसने मेरे दिलो-दिमाग को हिलाकर रख दिया है। पिछले तीन दिनों से मेरी आंखों में आंसू हैं, मैं सो नहीं पाया हूं, बस लगातार रो रहा हूं।'

छात्रों के अधिकारों और व्यवस्था पर सवाल

सुमन ने कड़े शब्दों में सवाल पूछते हुए कहा कि आखिर उन युवा और मासूम विद्यार्थियों का क्या कसूर था? क्या उनकी केवल इतनी सी गलती थी कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में फैले अन्याय और दमन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी?

  • वे अपने मौलिक अधिकारों, अपने उज्ज्वल भविष्य और उससे भी बढ़कर इस महान देश के भविष्य की खातिर सड़क पर उतरे थे।

  • वे केवल एक बेहतर और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी जायज बात सुनने के बजाय उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया और उन्हें निशाना बनाया गया।

उन्होंने आगे कहा, 'इस बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण घड़ी में, मैं देश के हर उस निडर युवा, हर छात्र समन्वयक, हर नौजवान और हर उस सच्चे भारतीय के साथ मजबूती से खड़ा हूं जिसका दिल इस देश की आन-बान और शान के लिए धड़कता है, तथा जिसके भीतर अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का अदम्य साहस है।'

जंतर-मंतर पर विरोध और फिल्म इंडस्ट्री का समर्थन

उल्लेखनीय है कि यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शनकारियों ने 'चलो संसद' मार्च के आह्वान के तहत जंतर-मंतर पर डेरा डाला था। ये सभी प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक समेत शिक्षा व्यवस्था की विभिन्न गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग कर रहे थे।

दूसरी ओर, नीट पेपर लीक और व्यापक शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे देश के इन युवाओं को अब बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री से भी खुला समर्थन मिलना शुरू हो गया है। अभिनेता सलमान खान, अभिनेत्री आलिया भट्ट, वरुण धवन, दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी और आर माधवन जैसी कई बड़ी हस्तियों ने भी खुलकर छात्रों के इस संघर्ष का समर्थन किया है।