Betul Rain Farming: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जुलाई माह के दूसरे पखवाड़े में लगभग १० दिन के ब्रेक के बाद जिले भर में हुई रिमझिम बारिश से खरीफ फसलों को संजीवनी मिल गई है। तीन दिनों तक बारिश होने के बाद पिछले दो दिनों से एक बार फिर मौसम खुल गया है। जिससे लगभग सभी किसान खेतों में खाद डालने और दवाई का छिड़काव करने में जुट गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आलम यह है कि किसानों और मजदूरों के खेत में काम करने से बाकी दूसरे निर्माण कार्यों के लिए मजदूर ही नहीं मिल रहे हैं। तीन दिनों तक हुई बारिश से मक्का, सोयाबीन, धान, मूंगफली, उड़द सहित सभी खरीफ फसलों के साथ ही गन्ने की फसल को भी जीवनदान मिल गया है।

जिले में इस साल बारिश रूक-रूक कर हो रही है। जुलाई के पहले सप्ताह में झमाझम बारिश होने के बाद ८ जुलाई से बारिश पर ब्रेक लग गया था। अधिकतर किसानों ने जून माह के अंतिम सप्ताह तक ही खरीफ फसलों की बोवनी ली थी। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश से अधिकतर किसानों की फसले उग भी गई थी। ८ जुलाई के बाद जिले भर में बारिश का दौर थमने से किसान फसलों में न तो खाद डाल पा रहे थे और ना ही नींदानाशक दवाई का छिड़काव कर रहे थे।

बारिश रूकने के साथ ही धूप पड़ने और तापमान बढ़ने से मक्का, सोयाबीन, धान की फसले मुरझाने लगी थी। कई किसानों, जिनके जल स्रोत में भरपूर पानी था, उन्होंने धान की क्यारी में पानी देना शुरू कर दिया था। बारिश के लिए कई जगह धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाने लगा था। लगभग १२ दिन बाद सोमवार से जिले में बारिश का दौर शुरू हुआ। सोमवार से बुधवार तक जिले में कहीं भी झमाझम बारिश तो नहीं हुई, लेकिन जिले के सभी स्थानों पर रिमझिम बारिश होती रही। तीन दिनों में जिले में लगभग दो इंच बारिश हुई है, जिसमें मृतप्राय: हो चुकी मक्का, धान, सोयाबीन की फसल फिर से लहराने लगी है।

बारिश होते ही किसानों ने खेत में यूरिया डालनी शुरू कर दी। पिछले दो दिनों से बारिश थमने के बाद नींदानाशक दवाई का छिड़काव शुरू कर दिया। वहीं कुछ किसानों ने ङ्क्षनदाई भी शुरू कर दी है। ग्राम पाढर के किसान मनोहरी उइके ने बताया कि बारिश नहीं होने से किसान खेतों में खाद और दवाई का छिड़काव नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब लगभग सभी किसानों द्वारा खाद और दवाई का छिड़काव किया जा रहा है।

खेतों में एक साथ काम आने से मजदूरों का टोटा पड़ गया है। अधिकतर मजदूर अपने खेतों में काम कर रहे हैं। राजमिस्त्री बलराम यादव ने बताया कि तीन दिनों तक बारिश नहीं होने से काम बंद था। बारिश खुलने के बाद अधिकतर मजदूर खेतों में काम कर रहे हैं। जिससे निर्माण कार्यों के लिए मजदूर ही नहीं मिल पा रहे हंै। जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।