Betul OBC Hostel Proposal: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। सरकार द्वारा पढ़ाई-लिखाई के मामले में किसी भी वर्ग के बच्चों के साथ भेदभाव नहीं बरते जाने के दावें जरुर किए जाते हैं, लेकिन यह दावें सिर्फ हवा-हवाई होते हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले भर में एससी-एसटी वर्ग के बच्चों के लिए जहां 136 छात्रावास और आश्रम हैं, वहीं ओबीसी वर्ग के लिए मात्र ही छात्रावास हैं। ओबीसी के लिए 2 साल पहले 10 छात्रावासों का प्रस्ताव भिजवाया गया था, पर आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। 

आज हर वर्ग में ऐसे परिवार बड़ी संख्या में मिल जाएंगे, जो कि अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई नहीं करवा सकते हैं। एससी-एसटी वर्ग के बच्चों की तरह अन्य वर्गों के बच्चों को भी पढ़ाई पूरी करने के लिए छात्रावास सहित अन्य मदद की दरकार होती है। सरकार इस मामले में एससी-एसटी वर्ग को तो सभी सुविधाएं मुहैया करा देती है, लेकिन ओबीसी और सामान्य वर्ग के साथ खासा भेदभाव बरतती है। इन वर्गों को अन्य कोई मदद मिलना तो दूर छात्रावास की सुविधा तक नहीं मिल पाती है।

एससी-एसटी के 136 छात्रावास 

एससी-एसटी वर्ग के बच्चों के लिए आज जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि दूरदराज के ग्रामीण अंचलों तक में छात्रावास और आश्रम की सुविधा मुहैया कराई गई है। इनमें एसटी वर्ग के लिए जूनियर, सीनियर और महाविद्यालय स्तर के लिए 71 छात्रावास, एससी वर्ग के लिए 21 छात्रावास है। इनके अलावा जूनियर लेवल के लिए 42 आश्रम और 2 क्रीड़ा परिसर भी संचालित हैं। इन सभी में कुल 7490 सीटें उपलब्ध हैं। इन दोनों ही वर्ग के बच्चे इन छात्रावासों, आश्रमों और क्रीड़ा परिसरों का लाभ लेकर अपनी पढ़ाई आसानी से पूरी कर लेते हैं। 

पिछड़ा वर्ग के बच्चों को भी है दरकार 

ऐसा नहीं है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों को छात्रावास जैसी सुविधा की जरुरत ही नहीं है। इस वर्ग के परिवारों की हालत भी ऐसी नहीं है कि वे अपने बच्चों को निजी हॉस्टलों या महंगे किराए के मकानों में रख कर पढ़ाई करवा सके। इस वर्ग के कई बच्चे तो केवल इसलिए पढ़ाई छोड़ देने को मजबूर हो जाते हैं कि उन्हें छात्रावास की सुविधा नहीं मिल पा रही है। 

केवल जिला मुख्यालय पर 2 छात्रावास

इधर सरकार का रवैया यह है कि जरुरत होने पर भी पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए छात्रावास की सुविधा जरुरत के अनुसार उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। हालत यह है कि केवल बैतूल शहर में पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए महज 2 छात्रावास ही उपलब्ध है। इनमें एक में 50 और दूसरे में 100 सीटें हैं। यह सीटें ऊंट के मुंह में जीरा समान है। 

दो साल पहले भिजवाया था प्रस्ताव 

इन्हीं सब को देखते हुए जिले से पिछड़ा वर्ग विभाग ने जिले के हर ब्लॉक में 2-2 छात्रावास इस वर्ग के बच्चों के लिए बनाने के प्रस्ताव भिजवाए गए थे। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती तो इस वर्ग के लिए 20 छात्रावास उपलब्ध हो जाते, लेकिन आज तक एक भी छात्रावास को मंजूरी नहीं मिल पाई है। इससे आज भी इस वर्ग के बच्चों को छात्रावास की सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।