बालेन शाह का बड़ा यू-टर्न, भारत-चीन राजदूतों से बातचीत के लिए दिखाई सहमति
काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी लंबे समय से चली आ रही 'एकला चलो' और विदेशी राजनयिकों से दूरी बनाने की नीति में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। नेपाली मीडिया में राजनयिक सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री शाह जल्द ही भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग व्यक्तिगत मुलाकातें करेंगे। अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद लिया गया यह निर्णय उनकी विदेश नीति और कूटनीतिक दृष्टिकोण में एक नए अध्याय का संकेत दे रहा है।
राजनयिक परंपराओं से दूरी और पूर्व के कड़े रुख
प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बालेन शाह ने परंपरागत कूटनीतिक ढर्रे से इतर रुख अपनाया हुआ था। उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख राष्ट्रों के राजदूतों तथा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों से सीधे मिलने से परहेज किया था। पूर्व में नेपाल यात्रा पर आए अमेरिकी अधिकारियों और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बार-बार लिखित अनुरोधों के बावजूद, उन्होंने घरेलू व्यस्तताओं का हवाला देकर मिलने से इनकार कर दिया था। राजनयिक हलकों में चर्चा थी कि वे जूनियर अधिकारियों के बजाय केवल अपने समकक्षों से ही वार्ता के पक्षधर थे।
प्रो-प्रोटोकॉल नीति में नरमी और आगामी मुलाकातों के मायने
बालेन शाह ने अपने इस अघोषित नियम को इस महीने की शुरुआत में तब शिथिल किया, जब 6 जुलाई को उन्होंने तीन दिवसीय नेपाल दौरे पर आए एशियाई विकास बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा से मुलाकात की। अब इसी कड़ी में भारत और चीन के राजदूतों के साथ प्रस्तावित वार्ताएं (जिनकी तिथियां इसी सप्ताह तय होने की संभावना है) नेपाल के अपने दोनों शक्तिशाली पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जाग्रत और मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत सकारात्मक व महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

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