Betul Nehru Park: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बीते लंबे समय से उपेक्षित पड़े जिला मुख्यालय के इकलौते नेहरू पार्क के संचालन और प्रबंधन का जिम्मा जल्द ही निजी हाथों में दिया जा सकता है। इस मुद्दे को आगामी पीआईसी की बैठक में रखा जा सकता है। वहां यह प्रस्ताव पारित होने पर जल्द ही इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है। इससे इस पार्क की दशा में काफी बदलाव और सुधार आ सकता है। हालांकि इसके लिए लोगों को कुछ शुल्क भी अदा करना पड़ सकता है। 

पूरे बैतूल शहर में एक ही पार्क है जहां पर बच्चे थोड़ा मनोरंजन करने आ सकते हैं। वहीं बड़े भी सुकून के कुछ पल बिताने के लिए आ सकते हैं। यह बात अलग है कि पिछले लंबे समय से इस पार्क पर ध्यान नहीं दिए जाने से इसके हाल बेहाल हो गए हैं। बच्चों के लिए यहां उपलब्ध झूले और फिसलपट्टी के जहां हाल बेहाल हैं वहीं दूसरी ओर दोनों फव्वारे भी लंबे समय से बंद हैं। इसी तरह यहां खड़ी ट्वॉय ट्रेन भी लंबे समय से पटरियों पर नहीं दौड़ी है। नगर पालिका ने भी हाल के सालों में कभी इसकी दशा सुधारने की कोशिश नहीं की। यही कारण है कि यह पार्क अब पार्क कम और उजाड़ स्थान अधिक लगता है। इन्हीं सब के चलते अब यहां आने वाले बच्चों की संख्या भी काफी कम हो गई है। 

इस विकल्प पर किया जा रहा विचार 

इन्हीं सब कारणों से अब नगर पालिका इस पार्क के संचालन और प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपने पर विचार कर रही है। जल्द ही पार्क को ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) मोड पर किसी संस्था को सौंपा जा सकता है। इसके लिए आगामी दिनों में होने वाली पीआईसी की बैठक में यह प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है। यहां यदि पीआईसी की हरी झंडी मिलती है तो फिर इसे अमली जामा पहना दिया जाएगा। 

क्या है ओएंडएम मोड 

ओएंडएम मोड का मतलब होता है संचालन और प्रबंधन करना। जिस किसी भी संस्था या फर्म को यह जिम्मा मिलेगा या दिया जाएगा वह संस्था पार्क के रखरखाव और संचालन कर सकेगी। पार्क के पूरे प्रबंधन की जिम्मेदारी फिर उसी की होगी। उसे नगर पालिका द्वारा कोई राशि प्रदान नहीं की जाएगी। यह जरुर होगा कि पार्क आने वाले लोगों को कुछ शुल्क अदा करना पड़ सकता है। 

इन गतिविधियों से हो सकती है आमदनी

अब सवाल यह उठता है कि जो संस्था या फर्म यह जिम्मा लेंगी, उसे आमदनी कहां से होगी। वह संस्था पार्क में नए-नए और आकर्षक झूले लगा सकती है, अन्य नई खेल सामग्रियां लगा सकती है, कैफे हाउस खोल सकती है। इन सुविधाओं का लाभ लेने के बदले संस्था शुल्क वसूल सकती है। बंद पड़ी ट्रेन को भी चालू कर उससे भी आय प्राप्त कर सकती है। उसे और भी कई अवसर मुहैया कराए जा सकते हैं।