जीतू पटवारी ने कोर्ट में किया सरेंडर, 25 हजार के मुचलके पर मिली बेल; मामला फिर चर्चा में
ग्वालियर। मध्य प्रदेश प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को ग्वालियर स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्रदान कर दी।
क्यों जारी हुआ था स्थायी गिरफ्तारी वारंट?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ अदालत की ओर से एक स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। यह पूरा कानूनी मामला लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान भिंड जिले के उमरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज एक प्रकरण से जुड़ा हुआ है। यह एफआईआर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पदाधिकारी अशोक गुप्ता की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
सार्वजनिक मंच से लगाया गया था गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, लोकसभा चुनाव के दौरान एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने बसपा के लोकसभा प्रत्याशी देवाशीष पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलीभगत (साठगांठ) होने का सार्वजनिक तौर पर गंभीर आरोप लगाया था। इसी विवादित बयान को आधार बनाते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले ही स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था। इससे पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सख्त चेतावनी भी दी थी कि यदि इस बार वारंट की तामील सुनिश्चित नहीं की गई, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट में सरेंडर और जमानत मिलने के बाद अगली तारीख तय
पुलिस और अदालती सख्ती के चलते सोमवार को जीतू पटवारी स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें राहत देते हुए 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली। इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई अब आगामी 27 जुलाई को होगी, जिस दिन अदालत में प्रकरण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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