आमिर खान और जूही चावला की ‘टाइम मशीन’ का राज खुला, स्क्रिप्ट पर करण जौहर की टिप्पणी पड़ी भारी
मुंबई। बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर और राइटर करण राजदान ने फिल्म इंडस्ट्री के शुरुआती दौर और अपने करियर के अनछुए पहलुओं पर खुलकर बात की है। बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि 90 के दशक में चर्चित रही और शेखर कपूर के निर्देशन में बनने वाली महत्वाकांक्षी फिल्म 'टाइम मशीन' के लेखक करण राजदान ही थे। आमिर खान और जूही चावला जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी इस साइंस-फिक्शन फिल्म ने पर्दे पर आने से पहले ही खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से यह प्रोजेक्ट बीच में ही बंद हो गया था। राजदान ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया कि आखिर इस मेगा बजट फिल्म को क्यों बंद करना पड़ा था।
महाभारत काल की पृष्ठभूमि पर आधारित थी फिल्म की अनोखी कहानी
फिल्म की मूल कहानी के बारे में बात करते हुए करण राजदान ने बताया कि इसकी पूरी पटकथा अभिनेता आमिर खान के किरदार के इर्द-गिर्द घूमती थी। फिल्म में उनका किरदार गलती से समय चक्र (टाइम मशीन) में पीछे चला जाता है और सीधे महाभारत के पौराणिक काल में जा पहुंचता है।
इस दिलचस्प घटनाक्रम को समझाते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुख्य किरदार को यह बिल्कुल पता नहीं होता कि उस जटिल मशीन को ऑपरेट कैसे किया जाता है। वह अनजाने में मशीन लेकर हवा में उड़ जाता है और सीधे अतीत में पहुंच जाता है। जब उसकी आंख खुलती है, तो उसे चारों तरफ भीषण युद्ध की गूंज सुनाई देती है। जब वह नीचे झांककर देखता है, तो पाता है कि वहां एक भयंकर संग्राम चल रहा है। तभी भगवान कृष्ण की नजर उस पर पड़ती है और जब मुख्य किरदार भगवान से पूछता है कि 'यह सब क्या हो रहा है?', तो भगवान कृष्ण मुस्कुराकर जवाब देते हैं, 'महाभारत लड़ी जा रही है!' यह सुनकर वह हैरान होकर कहता है, 'ओह, तो यह महाभारत है!'
एक व्यक्तिगत त्रासदी से आया था 'टाइम मशीन' का नायाब आइडिया
लेखक ने यह भी साझा किया कि उन्हें और निर्देशक शेखर कपूर को इस अनूठे 'टाइम मशीन' का विचार एक निजी और गहरी दुखद घटना के बाद आया था। उन्होंने बताया कि उस दौर में शेखर कपूर ने अपनी मां को खो दिया था और उन्होंने अपने पिता को। दोनों ही प्रियजनों का निधन महज छह महीने के अंतराल के भीतर हो गया था। उस वक्त वे दोनों मिलकर 'दुश्मनी' फिल्म पर काम कर रहे थे। एक दिन साथ बैठे हुए उन्होंने अपने इस दुनिया से जा चुके माता-पिता से सिर्फ एक बार और मिलने की गहरी इच्छा जताई थी। बस, वहीं से शेखर कपूर के मन में 'टाइम मशीन' का विचार आया और दोनों ने मिलकर इस पर काम करना शुरू कर दिया। करण राजदान ने बताया कि उन्होंने महज तीन महीनों के भीतर ही इसकी पूरी कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद लिख दिए थे।
दिग्गज संगीतकारों और कलाकारों के साथ शुरू हुई थी चर्चा
शुरुआती दौर में इस प्रोजेक्ट को लेकर माहौल काफी सकारात्मक था। शेखर कपूर इस प्रोजेक्ट को लेकर इतने अधिक उत्साहित थे कि उन्होंने तुरंत प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को भी इस सफर में अपने साथ जोड़ लिया था। राजदान ने बताया कि उन्होंने न केवल संगीतकारों को बल्कि मशहूर गीतकार आनंद बख्शी को उनके घर जाकर यह पूरी कहानी सुनाई थी। इसके अलावा मुख्य कलाकार के तौर पर आमिर खान, अभिनेता परेश रावल और अन्य कलाकारों को भी इसकी स्क्रिप्ट से अवगत कराया गया था।
करण जौहर द्वारा कम कीमत ऑफर किए जाने पर भड़के थे राजदान
फिल्म के निर्माण को लेकर कई बड़े निर्माताओं ने रुचि दिखाई थी। इस बारे में बात करते हुए राजदान ने बताया कि मनमोहन शेट्टी, रमेश तौरानी और करण जौहर जैसे नाम इसे बनाना चाहते थे। उन्होंने करण जौहर को भी इसकी स्क्रिप्ट भेजी थी, लेकिन उनकी तरफ से काफी कम कीमत ऑफर की गई थी।
इसके बाद उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस के साथ हुई अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय जुगल हंसराज धर्मा के स्टोरी डिपार्टमेंट के हेड हुआ करते थे। शेखर कपूर के कहने पर उन्होंने जुगल हंसराज से संपर्क किया था। राजदान ने जब खुद कहानी सुनाने की इच्छा जताई, तो उन्हें बताया गया कि करण जौहर को खुद स्क्रिप्ट पढ़ना पसंद है। बाद में उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए 25 लाख रुपये ऑफर किए गए, जिसे देखकर वह हैरान रह गए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था कि क्या वे सोना खरीदने आए हैं या पीतल, उन्हें यह समझना चाहिए कि वे उन्हें कितनी बड़ी और अनमोल चीज दे रहे हैं।
फिरोज नाडियाडवाला और राजकुमार संतोषी से जुड़ी बातें
बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जाने-माने प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला ने भी इस प्रोजेक्ट को दोबारा पुनर्जीवित करने और बनाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया था। उन्होंने निर्देशक राकेश रोशन (गुड्डू जी) के घर जाकर ऋतिक रोशन की मौजूदगी में पूरी कहानी सुनाई थी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि वे यह तय नहीं कर पा रहे थे कि इस बड़े प्रोजेक्ट का निर्देशन कौन संभालेगा। शेखर कपूर ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि चूंकि राजदान खुद इसके लेखक हैं, इसलिए निर्देशन की कमान उन्हें नहीं संभालनी चाहिए क्योंकि टीम को राइटिंग के मोर्चे पर उनके निरंतर इनपुट्स की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, अंत में उन्होंने यह भी बताया कि इस फिल्म के लिए मशहूर फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी के नाम पर भी विचार किया गया था, लेकिन वह इस बात से सहमत नहीं थे क्योंकि यह विषय और जॉनर राजकुमार संतोषी की विशेषज्ञता या शैली के दायरे में फिट नहीं बैठता था।

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