Battery Wood Stove: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। यह लाइन एक बार फिर साबित हुई, जब वर्तमान समय में रसोई गैस की किल्लत के दौरान बाजार में बैटरी चलित वुड स्टोव्ह लॉन्च हुआ है। पुराने लोहार चूल्हे की तरह बनाए गए इस चूल्हे में बैटरी लगी हुई है जो एक बार चार्ज होने के बाद १० से १२ घंटे चलती है। इस चूल्हे में ईंधन के रूप में लकड़ी के टुकड़े, कंडे, कोयला, भुट्टे की छूछ आदि का उपयोग किया जा सकता है। चूल्हा बेचने वालों का दावा है कि इस चूल्हे से एक किलो लकड़ी के टुकड़ों से १० लोगों का एक समय का पूरा खाना तैयार हो जाता है। मुंबई की एक कंपनी द्वारा निर्मित इस वुड स्टोव्ह को आठनेर के एक व्यापारी द्वारा जिले भर में बेचा जा रहा है। इस चूल्हे में जिस भी ईंधन का उपयोग किया जाता है, वह राख होने तक पूरी तरह जलता है। 

मीडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से पिछले कुछ माह से रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। रसोई गैस की किल्लत के बीच सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में रसोई गैस की बुकिंग ४५ दिन के अंतराल में कर दी है। जिससे उपभोक्ताओं को ५० दिन के बाद ही नया सिलेंडर मिल पाता है। चार लोगों के परिवार में भी एक गैस सिलेंडर बमुश्किल एक माह चल पाता है। जिससे नागरिक खाना बनाने के लिए दूसरे विकल्पों की ओर जा रहे हैं।

रसोई गैस की किल्लत का फायदा उठाते हुए मुंबई की एक कंपनी द्वारा वुड स्टोव्ह लॉन्च किया गया है। यह स्टोव्ह पुराने समय में लोहार के पास रहने वाले हाथ से घुमाने वाले चूल्हे की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसमें हाथ से पंखा घुमाने की जरूरत नहीं है। इस चूल्हे में बैटरी से चलने वाला एक पंखा लगाया गया है जिसका कनेक्शन बैटरी से किया गया है। बैटरी को बिजली से चार्ज किया जाता है। इसमें मोबाइल की बैटरी चार्ज होने बराबर बिजली उपयोग होती है। लगभग दो से तीन घंटे में बैटरी फुल चार्ज हो जाती है जो १० से १२ घंटे तक चलती है।

बैतूल के बडोरा क्षेत्र में चूल्हा बेच रहे आठनेर निवासी दिलीप बोड़खे ने बताया एक बार फुल चार्ज होने के बाद बैटरी १० से १२ घंटे तक चलती है। इसमें पंखे की हवा कम ज्यादा करने तीन स्पीड दी गई है जिसे आवश्यकतानुसार उपयोग किया जा सकता है। ईंधन के रूप में लकड़ी के छोटे टुकड़े, कोयला, कंडे सहित अन्य वेस्ट मटेरियल का उपयोग किया जा सकता है। श्री बोड़खे ने दावा किया है कि इस चूल्हे से धुंआ नहीं निकलता है और एक किलो लकड़ी के गुटके में लगभग १० लोगों का पूरा खाना बन जाता है। इसके साथ ही इसमें बना खाना पुराने समय में चूल्हे पर बने खाने जैसा ही स्वादिष्ट लगता है। इसके साथ ही पानी गर्म करने, भुट्टे सेंकने में भी इसका बेहतर उपयोग होता है। रसोई गैस की कमी और कम खर्च में चलने के कारण इसे काफी पसंद किया जा रहा है।