ममता बनर्जी गुट को हाई कोर्ट से राहत नहीं, फ्रीज बैंक अकाउंट्स पर रोक बरकरार
कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उस समय बड़ा झटका दिया है, जब कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के बैंक खातों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ED ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था, जिनमें कुल 440 करोड़ रुपये की धनराशि जमा है। पूर्व में हाई कोर्ट की एक अन्य बेंच ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ इन खातों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए आंशिक रूप से खोलने की मंजूरी दी थी, लेकिन ED ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पुनः फ्रीज कर दिया था, जिस पर अब हाई कोर्ट ने अपनी असहमति जताई है।
अदालत की सख्त निगरानी और पूर्व आदेश
इससे पहले की सुनवाई में, हाई कोर्ट की एक बेंच ने इन खातों के संचालन के लिए एक विशेष व्यवस्था लागू की थी। अदालत ने बैंक खातों के कामकाज की देखरेख के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी (स्पेशल ऑफिसर) के रूप में नियुक्त किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पार्टी इन खातों का उपयोग केवल अपने दैनिक प्रशासनिक और जरूरी कार्यों के लिए ही कर सकेगी। किसी भी भुगतान के लिए अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के साथ-साथ स्पेशल ऑफिसर के काउंटर-सिग्नेचर अनिवार्य किए गए थे।
कार्रवाई की तत्परता पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि 18 जून को एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद 19 जून को इतनी जल्दबाजी में खातों को फ्रीज कर दिया गया। अदालत ने तंज कसते हुए कहा था कि शुरुआती जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस आधार या साक्ष्य नजर नहीं आता, जो इतनी तीव्र कार्रवाई को उचित ठहरा सके। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि आम नागरिकों के मामलों में पुलिस अक्सर इतनी तत्परता नहीं दिखाती है, जितनी इस मामले में दिखाई गई है।
वित्तीय पाबंदियां और पार्टी के समक्ष संकट
अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की देखरेख में भी पार्टी को केवल सीमित वित्तीय स्वतंत्रता ही दी गई थी, ताकि रोजमर्रा के कामकाज न रुकें। हालांकि, ED द्वारा खातों को फिर से फ्रीज करने और हाई कोर्ट द्वारा राहत न मिलने के बाद TMC के लिए अपनी वित्तीय गतिविधियों को संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिलहाल, 440 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि के फ्रीज रहने से पार्टी के सामने अपने दैनिक खर्चों को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह कानूनी लड़ाई अब और अधिक जटिल होती जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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