MP को बड़ी सौगात! चंबल एक्सप्रेसवे से भिंड, मुरैना, बुंदेलखंड और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे होंगे आपस में जुड़े
ग्वालियर। मध्य भारत की तस्वीर बदलने की दिशा में 'अटल प्रगति पथ' (चंबल एक्सप्रेसवे) एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को आपस में जोड़ने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विकसित किया जा रहा यह 409 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चंबल नदी के समानांतर गुजरेगा। शुरुआत में इसे 4-लेन के रूप में बनाया जा रहा है, जिसे भविष्य में 6-लेन तक विस्तारित करने की योजना है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
कनेक्टिविटी का नया राष्ट्रीय गलियारा
यह एक्सप्रेसवे न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि दो बड़े राष्ट्रीय गलियारों—दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे—को आपस में जोड़ेगा। यह उत्तर प्रदेश के इटावा से शुरू होकर मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों से होते हुए राजस्थान के कोटा तक जाएगा। इस रूट के निर्माण से ग्वालियर से आगरा की दूरी काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा, यह नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को भी क्रॉस करेगा, जिससे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा सुगम और तेज हो जाएगी।
आर्थिक और औद्योगिक कायाकल्प की उम्मीद
अटल प्रगति पथ का एक बड़ा हिस्सा चंबल के बीहड़ों और अनुपजाऊ भूमि से होकर गुजरेगा, जिससे इन क्षेत्रों के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ होगा। सरकार की योजना है कि इस सड़क के दोनों किनारों पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), लॉजिस्टिक्स पार्क और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स विकसित किए जाएं। इससे भिंड, मुरैना और श्योपुर जैसे जिलों में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं का पलायन थमेगा। इसके साथ ही, किसानों को अपनी उपज को दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसी बड़ी मंडियों तक जल्दी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
पर्यटन और भविष्य की कार्ययोजना
यह एक्सप्रेसवे न केवल उद्योग, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगा। यह रूट राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और ग्वालियर-चंबल संभाग के ऐतिहासिक किलों तक पर्यटकों की पहुंच को सुगम बनाएगा। इसके निर्माण को इको-फ्रेंडली रखा गया है, जिसके तहत सड़क के किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की योजना है। वर्तमान में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल परियोजना के 2029 से 2030 तक बनकर तैयार होने की संभावना है, जो पूरे मध्य भारत के आर्थिक भूगोल को बदलने की क्षमता रखती है।

Betul Air Force Candidate Death: एयरफोर्स ज्वाइनिंग से एक दिन पहले युवक की मौत, कुएं में मिला शव, सड़क पर उतरे ग्रामीण
Madhya Pradesh Bus Strike: 7 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम, नहीं मानी मांगें तो थम जाएंगे बसों के पहिए