जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका, लाठीचार्ज से बढ़ा तनाव
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित 'संसद मार्च' के दौरान सोमवार को जंतर-मंतर पर भारी हंगामा देखने को मिला। पेपर लीक और युवा बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो पुलिस और आरपीएफ कर्मियों ने उन्हें खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।
नेताओं और हस्तियों का समर्थन
सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता और सामाजिक हस्तियां शामिल हुईं। आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ ही नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद भी प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद रहे। वहीं, फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वे युवाओं के हक की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं और सरकार पर युवाओं के भविष्य के प्रति उदासीन रहने का गंभीर आरोप लगाया।
सुरक्षा घेरा और मेट्रो सेवाओं पर असर
संसद मार्च की आहट मिलते ही दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी थी। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ सहित पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक जंतर-मंतर पर एकत्र हुए, जिसके बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई और पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी।
प्रदर्शन के प्रमुख कारण और मांगें
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के आह्वान पर हो रहे इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और बेरोजगारी के संकट पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भारी अनियमितताएं हो रही हैं और छात्र तनाव व अवसाद के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं, लेकिन कोई भी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है और यह स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस सुनवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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