Betul Patwari Transfer: बैतूल में दबा दिया गया तबादला आदेश, लोकायुक्त जांच वाले पटवारी को मिलता रहा संरक्षण
Betul Patwari Transfer: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। सरकारी तंत्र में काम कितनी मुस्तैदी से होता है और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपियों को कितने अथाह मौके मुहैया कराए जाते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण एक पटवारी का तबादला आदेश है। लोकायुक्त में एक प्रकरण दर्ज होने पर पटवारी का तबादला तो 11 मई को कर दिया गया था, लेकिन मजे की बात यह है कि तबादले से संबंधित यह फाइल ही विभाग के धुरंधरों ने दबा ली थी। किसी तरह यह मामला उजागर हुआ तो फिर आनन-फानन में पटवारी को रिलीव किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बैतूल तहसील में पदस्थ पटवारी रमेश अमझरे के खिलाफ विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त संगठन भोपाल में कोई शिकायत हुई थी। इस पर लोकायुक्त पुलिस द्वारा मामले की जांच के बाद पटवारी रमेश अमझरे के विरूद्ध अपराध क्रमांक 233/26, धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं संशोधित अधिनियम 2018 के अंतर्गत 10 मार्च 2026 को पंजीबद्ध किया गया। लोकायुक्त द्वारा इस मामले की फिलहाल विवेचना जारी है।
दो-दो विभागों ने दी थी सूचना
पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी मामला दर्ज होने के बाद राजस्व विभाग मंत्रालय भोपाल ने 24 मार्च 2026 और विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त संगठन भोपाल द्वारा 12 मार्च 2026 को ही पत्र लिख कर पटवारी के विरूद्ध प्रकरण पंजीबद्ध होने संबंधी सूचना लिखित रूप में जिले के अधिकारियों को दे दी थी।
इसलिए किया जाता विभाग को सूचित
सामान्यत: ऐसे मामले सामने आने पर उस कर्मचारी या अधिकारी के विरूद्ध भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण पंजीबद्ध होने पर उससे जुड़े विभाग को इसलिए सूचना दी जाती है ताकि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के विरूद्ध निलंबन या स्थानांतरण की कार्यवाही की जाएं ताकि एक तो जांच प्रभावित न हो और दूसरा उसका भ्रष्ट रवैया जारी न रहे।
अफसर ने किया आदेश, पालन ही नहीं
जिले में भी पटवारी के विरूद्ध प्रकरण दर्ज होने संबंधी सूचना आने पर बिना कोई देरी किए अपर कलेक्टर वंदना जाट ने 11 मई 2026 को ही पटवारी रमेश अमझरे के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उसे बैतूल ग्रामीण तहसील से स्थानांतरित कर प्रभातपट्टन तहसील में पदस्थ कर दिया था। यह बात अलग है कि इस आदेश का अभी तक पालन ही नहीं हुआ था।
आदेश पर नहीं कराया गया था अमल
मजे की बात यह है कि पटवारी के विरूद्ध अपर कलेक्टर द्वारा जारी किए गए इस तबादला आदेश पर अमल करवाना न तो एसडीएम ने जरुरी समझा और न ही तहसीलदार ने ही। इसके विपरीत अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक यह आदेश और फाइल ही दबाकर बैठ गए। यही कारण है कि आज तक यह पटवारी उसी हलके में पदस्थ रहकर अपनी उसी कार्यशैली में बेखौफ होकर कार्य करता रहा। जिसके कारण पता नहीं और कितने लोगों को परेशान होना पड़ा होगा।
मामला उजागर होने पर किया रिलीव
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग भोपाल और लोकायुक्त संगठन द्वारा जब अपने पत्र पर की गई कार्रवाई की जानकारी चाही गई तब वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में यह बात आई कि पटवारी को मई माह में ही स्थानांतरित कर दिया है पर रिलीव आज तक नहीं किया गया है। इस पर जब उन्होंने पूछताछ की तो इसे लेकर हड़कंप मच गया और फिर आनन-फानन में बैतूल ग्रामीण तहसील से पटवारी रमेश अमझरे को प्रभातपट्टन के लिए रिलीव किया गया। हालांकि इस प्रकरण से इस बात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि जब अपर कलेक्टर जैसे उच्च अधिकारी के इस महत्वपूर्ण आदेश का जिला मुख्यालय पर ही अमल नहीं हो पाया तो फिर दूरदराज के इलाकों में इनके आदेशों को कितनी तवज्जो दी जाती होगी।

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