महाभारत की अमर कथावाचिका तीजन बाई का निधन, देशभर में शोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक कला और विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया है। वे 70 वर्ष की थीं। उन्होंने शनिवार देर रात (तड़के 3:15 बजे) रायपुर के एम्स (AIIMS) अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं।
अपनी दमदार आवाज, बेहतरीन अभिनय और अनोखे अंदाज से महाभारत की कहानियों को जीवंत करने वाली तीजन बाई का जाना कला जगत के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है। रविवार सुबह 11 बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
नाना से मिली थी महाभारत की कथा सुनाने की प्रेरणा
भिलाई के करीब गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई को बचपन में अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कहानियां सुनने को मिलती थीं। यहीं से उनके मन में पंडवानी के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ। उस दौर में जब महिलाओं का मंच पर आना भी मुश्किल माना जाता था, तब उन्होंने समाज की परवाह न करते हुए हाथ में 'तंबूरा' थामा और कापालिक शैली में पंडवानी गाकर दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने देश के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और स्विट्जरलैंड जैसे कई देशों में प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।
तीनों पद्म पुरस्कारों से थीं सम्मानित
भारतीय लोक कला और संस्कृति में उनके बेजोड़ योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के शीर्ष नागरिक सम्मानों से नवाजा था। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और संगीत कला रत्न जैसी कई बड़ी उपाधियां भी मिली थीं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर लिखा, "उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।"
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी दुख जताते हुए कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सात समंदर पार पहुंचाया। उनका जीवन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

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