पूजा में क्यों बजाते हैं घंटी? काशी के ज्योतिषाचार्य से जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य
सनातन धर्म में देवी-देवताओं के पूजा-पाठ का शास्त्रीय विधान है. इसमें हर छोटी-बड़ी चीज के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक वजहें हैं. पूजा के दौरान कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें हम करते तो हैं, लेकिन उसके पीछे क्या धार्मिक वजह है, इसे नहीं जानते हैं. घर और मंदिरों में पूजा के दौरान लोग घंटियां बजाते हैं. मंदिर और घरों में ऐसा क्यों किया जाता है? इसके पीछे क्या वजहें हैं? आइये जानते हैं इसके बारे में काशी के ज्योतिषाचार्य से….
घंटी बजाने से दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि घंटी का बजना सनातन धर्म में शुभता का प्रतीक माना जाता है. इसकी आवाज से घर और मंदिरों में पॉजिटिव ऊर्जा का संचार होता है. इसके साथ ही नेगेटिव ऊर्जा समाप्त होती है. घंटी की आवाज से मन एकाग्र होता है. इससे ध्यान-साधना के लिए भक्तिमय माहौल भी बनता है.
देवी-देवताओं को बेहद प्रिय है यह ध्वनि
देवी-देवताओं के आह्वान के लिए मंदिर और घर में पूजा के दौरान घंटी बजाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि देवी-देवताओं को भी घंटा-नाद की ध्वनि अतिप्रिय होती है. शास्त्रों के मुताबिक, घंटी से निकलने वाली ध्वनि ‘ॐ’ की ध्वनि का स्वरूप होती है. इसलिए जिस जगह नित्य सुबह और शाम घंटी बजती है, वहां नेगेटिव यानी आसुरी शक्तियां कभी भी वास नहीं करती हैं.
अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए अलग-अलग घंटियां
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि घर या मंदिर में प्रयोग होने वाली घंटियां अलग-अलग तरह की होती हैं. जिस घंटी पर नंदी बना होता है, उसका प्रयोग भगवान शिव की पूजा के लिए करते हैं. इसके अलावा गाय की आकृति बनी घंटी का प्रयोग भगवान कृष्ण के लिए होता है. वहीं सिंह वाली घंटी का प्रयोग देवी की पूजा-उपासना में किया जाता है. इससे देवी-देवता अतिशीघ्र ही प्रसन्न होते हैं.
घंटी बजाने के पीछे का ये है वैज्ञानिक कारण
सनातन धर्म में हर छोटी-बड़ी चीज का वैज्ञानिक कनेक्शन भी होता है. विज्ञान के अनुसार, पीतल से बनी घंटियों से जब आवाज निकलती है, तो उससे एक तेज कंपन उत्पन्न होता है. इस कंपन की आवाज से आसपास के वायरस और जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध होता है.

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