IAS तबादले पर बवाल: विझिनजम पोर्ट मामले में माकपा ने सरकार से पूछा—किसे पहुंचाया जा रहा फायदा?
तिरुवनंतपुरम। केरल के विझिनजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह (पोर्ट) को लेकर राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मुख्य विपक्षी दल माकपा (सीपीआई-एम) ने मौजूदा सरकार पर कॉर्पोरेट जगत को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस विवाद के केंद्र में विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट की प्रबंध निदेशक (एमडी) व आईएएस अधिकारी दिव्या एस अय्यर का अचानक किया गया तबादला है। माकपा का दावा है कि एक बड़े निजी कारोबारी समूह के आर्थिक हितों को साधने के लिए ही इस ईमानदार अधिकारी को पद से हटाया गया है। विपक्ष ने इस पूरे प्रशासनिक फेरबदल को लेकर मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से स्पष्टीकरण की मांग की है।
आईएएस अधिकारी के तबादले पर विपक्ष का कड़ा ऐतराज
माकपा के वरिष्ठ नेता के.के. रागेश ने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि आईएएस दिव्या एस अय्यर विझिनजम बंदरगाह समझौते की मूल शर्तों में किसी भी तरह के बदलाव की कोशिशों का डटकर विरोध कर रही थीं और राज्य सरकार के हितों की रक्षा में लगी थीं। इसी वजह से निजी समूह उन्हें इस पद से हटवाने के प्रयास में जुटा था। विपक्ष का कहना है कि नई सरकार के सत्ता में आते ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट के नेतृत्व से एक अनुभवी अधिकारी को हटाकर स्थानीय स्वशासन विभाग में भेज दिया गया और उनकी जगह एक ऐसे व्यक्ति को कमान सौंप दी गई जिन्हें पोर्ट प्रशासन का कोई पूर्व अनुभव नहीं है।
शेयर ट्रांसफर विवाद और सरकार की भूमिका पर घेराव
यह पूरा राजनीतिक गतिरोध अदाणी पोर्ट्स द्वारा विझिनजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड में अपनी 49 फीसदी हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की दिग्गज शिपिंग कंपनी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) को बेचने की योजना से उपजा है। माकपा का आरोप है कि इस प्रकार का बड़ा हिस्सेदारी हस्तांतरण राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना संभव ही नहीं है। विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि क्या वह इस संदिग्ध सौदेबाजी को रोकने के लिए कोई कानूनी कदम उठाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन का कहना है कि इस शेयर ट्रांसफर के बारे में सरकार को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री के निजी दौरे और जांच समिति पर तीखे सवाल
विपक्षी दल ने केवल पोर्ट सौदे पर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की हालिया मंगलूरू यात्रा पर भी उंगली उठाई है। माकपा ने पूछा है कि मुख्यमंत्री ने अचानक एक चार्टर्ड विमान से यह दौरा क्यों किया और इस बेहद खर्चीली हवाई यात्रा के लिए फंड किसने मुहैया कराया था। इसके साथ ही, हिस्सेदारी विवाद की जांच के लिए बनाई गई अधिकार प्राप्त समिति की विश्वसनीयता को भी चुनौती दी गई है। विपक्ष का तर्क है कि इस कमेटी में मुख्यमंत्री के अपने ही विभागों के अफसर शामिल हैं, ऐसे में यह समिति बिना किसी दबाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच कैसे कर पाएगी।

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