यूपी में अचानक धंसी जमीन, हिलने लगी इमारत; 55 लोगों की बाल-बाल बची जान
कानपुर। काकादेव के नवीननगर एम ब्लॉक स्थित चार मंजिला हार्मनी डीलक्स अपार्टमेंट के बेसमेंट की फर्श धंसने से दीवार भरभराकर गिर गई। इस हादसे में कई बाइकें और स्कूटी मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसा शुक्रवार सुबह तेज बारिश के दौरान हुआ। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस, दमकलकर्मियों और एसडीआरएफ की टीम ने करीब एक घंटे का सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 13 फ्लैटों में रहने वाले 55 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) के विशेष कार्याधिकारी के अनुसार, अपार्टमेंट एक तरफ झुक गया है, जिसके चलते एहतियात के तौर पर इसे पूरी तरह खाली करा लिया गया है। वहीं, फ्लैट में रहने वाले लोगों का आरोप है कि बेसमेंट में कई दिनों से नियमों के विपरीत जाकर गहरी खोदाई की जा रही थी। इसके साथ ही अपार्टमेंट के नीचे किए गए मेट्रो निर्माण कार्य से भी जमीन कमजोर हो गई थी।
अचानक हिलने लगी इमारत, मलबे में दबी गाड़ियां
अपार्टमेंट निवासियों ने आरोप लगाया कि बेसमेंट में हो रही खोदाई और अंडरग्राउंड मेट्रो के विपरीत कार्य की शिकायत कई बार संबंधित विभागों से की गई थी, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे अचानक इमारत हिलने लगी और कुछ ही पलों में ग्राउंड फ्लोर की फर्श धंसने के साथ एक हिस्से की दीवार भरभराकर गिर गई। इससे वहां एक गहरा गड्ढा हो गया।
गड्ढे और मलबे में दबकर कई स्कूटी और बाइकें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिन्हें बाद में क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया। सूचना पर एसीपी कर्नलगंज आकांक्षा पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और उनके निर्देश पर राहत कार्य तेजी से शुरू किया गया।
आंसुओं में डूबे आशियाने, जांच के आदेश
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों से लोगों ने भारी नाराजगी जाहिर की। फ्लैट मालिकों का कहना था कि उन्होंने जीवनभर की गाढ़ी कमाई और बैंक से भारी-भरकम लोन लेकर यह आशियाना खरीदा था। अब किस्तें भी भरनी हैं और रहने के लिए घर भी नहीं बचा। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें आज यह दिन देखना पड़ रहा है।
काकादेव थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस ने फ्लैट में रहने वाले सभी लोगों की सूची तैयार कर ली है। जांच रिपोर्ट और तकनीकी खामियों के आधार पर आगे की कार्रवाई केडीए और संबंधित विभागों द्वारा की जाएगी।
विधायक बोले- जांच में जो भी दोषी होगा, बख्शा नहीं जाएगा
क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और हालात का जायजा लिया। उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट मैनेजर से इस संबंध में बात की। मेट्रो प्रशासन का दावा है कि उनका निर्माण कार्य सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है। उनकी प्राथमिक जांच के अनुसार, बेसमेंट में अत्यधिक खोदाई और उसमें पानी भरने से मिट्टी धंसने के कारण यह हादसा हुआ है।
विधायक ने केडीए उपाध्यक्ष को तत्काल तकनीकी टीम भेजकर विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में बिल्डर की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और यदि मेट्रो परियोजना की कोई चूक पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।
आरोपों और दावों के बीच फंसा मामला
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बिल्डर/प्राधिकरण पक्ष: बिल्डिंग का मानचित्र स्वीकृत है, फिर भी इसकी जांच कराई जा रही है। मेट्रो की खोदाई की वजह से बिल्डिंग नीचे से खोखली हो गई, जिस वजह से यह झुक गई।
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मेट्रो प्रशासन का पक्ष: घटनास्थल पर मेट्रो का काम महीनों पहले (जनवरी 2026 में ही) खत्म हो चुका है। यूपीएमआरसी की टीम जब मौके पर पहुंची तो अपार्टमेंट के बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और वहां अवैध खुदाई व निर्माण कार्य चल रहा था, जो इस हादसे की मुख्य वजह बना।

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