Betul Solar Captive Energy: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले भर की नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को हर महीने बिजली खर्च के रूप में तगड़ी राशि अदा करना होता है। चाहे जल आपूर्ति हो या स्ट्रीट लाइट या फिर कार्यालयों में होने वाली बिजली का उपयोग हो, इन सभी पर लाखों रुपये की बिजली की खपत होती है। हालांकि शासन की नई योजना से अब जिले के सभी नगरीय निकाय बिजली पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत कर सकते हैं। इससे नगरीय निकायों के लाखों रुपये बचेंगे और यह राशि जनहित के अन्य कार्यों पर खर्च की जा सकेगी। 

सरकार का प्लान है कि सोलर प्लांटों के माध्यम से नगरीय निकायों को जोड़कर उन्हें सस्ती बिजली मुहैया कराई जाए ताकि बिजली के नाम पर खर्च होने वाली राशि को अन्यत्र खर्च की जा सके। इसके लिए एक प्लान यह है कि सरकार स्वयं ही सारणी में एक 5 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाएगी। इसमें नगरीय निकायों को लागत का 26 प्रतिशत हिस्सा ही वहन करना होगा, शेष राशि सरकार खुद लगाएगी।

इसके बाद नगरीय निकायों का अनुबंध होगा और उन्हें सामान्य दर के मुकाबले 20 प्रतिशत कम पर बिजली मुहैया कराई जाएगी। दूसरा विकल्प यह है कि निजी फर्म द्वारा स्वयं सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसमें नगरीय निकायों को कुछ भी राशि खर्च नहीं करना होगा। उन्हें बस फर्म से अनुबंध भर करना होगा कि वे लगातार बिजली लेते रहेंगे। यह बिजली भी सस्ती दरों पर मिलेगी। इसके लिए दिल्ली की एक फर्म ने प्लांट लगाने में रूचि जताते हुए निकायों से राय भी मांगी है। 

नगरीय निकायों को लिखा गया पत्र 

इसके बाद शहरी विकास अभिकरण बैतूल के परियोजना अधिकारी नवनीत पांडेय ने सभी निकायों को पत्र भी लिख दिया है। उन्हें इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से समझाइश भी दी गई है। यदि सभी निकायों से सकारात्मक जवाब मिलता है तो फिर जल्द ही इस दिशा में बात आगे बढ़ाई जाएगी। फर्म केवल यह आश्वासन चाह रही है कि उसके द्वारा उत्पादित की जाने वाली बिजली लगातार ली जाती रहेगी क्योंकि प्लांट स्थापित करने में करोड़ों रुपये की लागत आएगी। 

किस निकाय में कितनी होती खपत 

उल्लेखनीय है कि बैतूल नगर पालिका द्वारा ही हर महीने करीब 7 लाख यूनिट बिजली की खपत की जाती है। इसके लिए करीब 50 लाख रुपये का बिल हर महीने अदा किया जाता है। इसी तरह सारणी नगर पालिका द्वारा 2 लाख यूनिट, मुलताई नगर पालिका द्वारा 2 लाख यूनिट और आमला नगर पालिका द्वारा 1.5 लाख यूनिट बिजली की खपत हर महीने कर ली जाती है। 

हर महीने लाखों रुपये बच सकेंगे 

सोलर प्लांट से बिजली लेने पर निकायों को सस्ती बिजली मिलेगी। अभी यदि नगरीय निकायों को 8 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलती है तो सोलर वाली बिजली लगभग 20 प्रतिशत सस्ती यानी 6 रुपये प्रति यूनिट मिलेगी। इससे केवल बैतूल नगर पालिका की ही बचत का अंदाजा लगाए तो 10 से 15 लाख रुपये की बचत हर महीने हो सकेगी। इस राशि का उपयोग अन्य किसी महत्वपूर्ण कार्य में हो सकेगा। 

प्लांट के लिए चाहिए इतनी जमीन 

हालांकि निजी फर्म द्वारा यदि प्लांट लगाया जाता है तो एक बड़ी समस्या जमीन की आएगी। इसके लिए 25 से 50 एकड़ तक जमीन चाहिए। हालांकि इसके लिए निजी फर्म के पास एग्रो वाल्टिक्स प्लांट का भी विकल्प मौजूद हैं। इसमें किसी बड़े तालाब या डैम में भी सोलर प्लेटें लगाकर बिजली उत्पादित की जा सकती है। इस विकल्प पर भी विचार जारी है।