Betul Heavy Rain Alert: बैतूल में बारिश का रौद्र रूप, 3 दिन भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी
Betul Heavy Rain Alert: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। इस साल जिले में बारिश की शुरूआत भले ही थोड़ी देरी से हुई थी, लेकिन चंद दिनों में ही न केवल बारिश ने देरी की भरपाई की, बल्कि बीते साल से आगे भी निकल गई है। इसके अलावा अगले 3 दिनों में भी जिले में अति भारी और भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया है। जिले में अभी तक कुल 185.6 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुई 181.5 मिमी से अधिक है। मुलताई क्षेत्र में विगत 24 घंटे में मानसून खासा मेहरबान रहा। यहां इस दौरान 112 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
मौसम केंद्र भोपाल ने चेतावनी जारी की है कि बैतूल जिले में 3 जुलाई को गरज-चमक के साथ अति भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 115.6 से 204.4 मिलीमीटर बारिश होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। इसके अलावा 4 और 5 जुलाई को भी जिले में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान यहां 64.5 से 115.5 मिलीमीटर बारिश हो सकती है। 6 जुलाई के लिए फिलहाल ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
गुरुवार दिन भर छाए रहे घने बादल
बैतूल शहर में गुरुवार को भी दिन भर आसमान पर बादल छाए रहे। इसके अलावा कई बार हल्की रिमझिम बारिश भी होती रही। दूसरी ओर पिछले 24 घंटे के दौरान आज सुबह 8 बजे तक सबसे अधिक 112 मिमी बारिश मुलताई में दर्ज की गई, जिससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ। इसके अलावा प्रभात पट्टन में 36.2 मिमी, आमला में 11 मिमी, आठनेर में 10.1 मिमी, भीमपुर में 10 मिमी, भैंसदेही में 7 मिमी, चिचोली में 5 मिमी और बैतूल में 1.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। घोड़ाडोंगरी और शाहपुर में बारिश नहीं हुई।
कुल बारिश का आंकड़ा 185.6 पर
जिला भू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार जिले की औसत दैनिक वर्षा 19.3 मिमी रही, जबकि जिले की कुल औसत वर्षा 185.6 मिमी पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की 181.5 मिमी संचयी वर्षा से अधिक है। यानी इस बार मानसून ने शुरुआती दौर में ही पिछले वर्ष का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।
निचले इलाकों में घुस गया पानी
मुलताई में 112 मिमी बारिश के कारण कई कॉलोनियों और निचले इलाकों में पानी भर गया। कुछ घरों में भी पानी घुसने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खेतों में भी पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, हालांकि खरीफ फसलों के लिए यह बारिश लाभदायक मानी जा रही है।

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