Compassionate Appointment Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उस परिवार के सदस्य को जल्द अनुकंपा नियुक्ति मिल जाने पर ही राहत मिल सकती है। लेकिन, जिले में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में पद खाली नहीं होने से उतनी मुस्तैदी से काम नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि जिले में सालों बाद भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है। कुछ प्रकरणों में तो 5 साल बाद भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकी है। ऐसे में नियुक्ति का इंतजार कर रहे लोग मायूस होने लगे हैं। हालांकि नवागत कलेक्टर ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है और अब इन प्रकरणों की फाइलें तेजी से चलने लगी हैं। यही कारण है कि आवेदकों को भी जल्द नियुक्ति मिलने की आस जग गई है। 

यदि किसी अधिकारी-कर्मचारी की सेवा में रहते हुए किन्हीं कारणों से मृत्यु हो जाती है तो सरकार द्वारा उसके परिवार के एक पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाती है। इसके लिए उक्त सदस्य के पास पद के अनुरूप योग्यता होना चाहिए। अनुकंपा नियुक्ति देने का उद्देश्य यही है कि परिवार के कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर भी उस परिवार की आमदनी लगातार जारी रहे और किन्हीं परेशानियों का सामना न करना पड़े। कई बार पद के अनुरूप योग्यता नहीं होने पर उक्त योग्यता प्राप्त होने तक इंतजार भी किया जा सकता है। उसके बाद आवेदन कर सकते हैं। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में जल्द से जल्द निर्णय होकर नियुक्ति मिल जाए तो परिवार को वास्तव में बड़ा सहारा मिल सकता है, लेकिन कई कारणों से ऐसा होना संभव नहीं हो पाता है। 

जिले में लंबित पड़े हैं 51 प्रकरण 

जिले में फिलहाल स्थिति यह है कि अनुकंपा नियुक्ति के 51 प्रकरणों का सालों से निराकरण नहीं हो सका है और न ही आवेदकों को नियुक्ति ही मिल पाई है। कई आवेदकों की स्थिति यह हो गई है कि इंतजार करते-करते उनकी उम्र बीतती जा रही है। उन्हें यह डर सता रहा है कि कहीं उनकी उम्र इतनी अधिक न हो जाए कि वे सरकारी नौकरी के लिए आवेदन ही न कर पाए और इधर अनुकंपा नियुक्ति भी न मिल पाए। इसी के चलते वे खासे चिंतित हैं। 

अब कहीं भेजे गए हैं 14 प्रकरण 

कलेक्टर डॉ. संजय सोनवणे ने अनुकंपा नियुक्ति के मामलों को बेहद गंभीरता से लिया है। वे लगातार इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द से जल्द नियुक्तियां देने के प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि हाल ही में 14 प्रकरणों का निराकरण कर नियुक्तियां देने के लिए वन विभाग, शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और जेएच कॉलेज को भेजा गया है। इन विभागों द्वारा आवेदकों को नियुक्ति प्रदान करने की कार्यवाही की जाएगी। यह सभी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद हैं। 

अन्य विभागों को भी लिखा गया पत्र 

बताया जाता है कि यह 14 प्रकरण भेजने के बाद भी अभी भी 37 प्रकरणों में नियुक्ति का इंतजार है। इसके चलते अन्य विभागों को भी पत्र लिखा गया है कि वे भी अपने यहां रिक्त पड़े राज्य स्तर के पदों पर अपने-अपने विभागों के उच्च अधिकारियों से रोस्टर के अनुसार अनुमति लेकर नियुक्तियां करवाएं। इन सभी से अनुकंपा के मामलों में जल्द नियुक्तियां मिलने की संभावना जताई जा रही है। 

इन कारणों से नहीं हो पा रही नियुक्तियां 

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति केवल पद रिक्त होने पर ही की जा सकती है। जिले में ऐसे पद ही रिक्त नहीं हैं, जिन पर अनुकंपा नियुक्ति की जा सके। यही वजह है कि यहां अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार करने वाले आवेदकों को सालों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कलेक्टर द्वारा इस मामले में गंभीरता दिखाने के बाद अब आवेदकों को भी उम्मीद जाग गई है कि उन्हें जल्द अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी।