Fertilizer Token System: डीएपी गायब, महंगी एनपीके खरीदने को मजबूर किसान; टोकन सिस्टम बना मुसीबत
Fertilizer Token System: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। खरीफ फसलों की बोवनी शुरू होने के दौरान उर्वरक विक्रय के लिए टोकन सिस्टम लागू होने से परेशान किसान पिछले लगभग एक सप्ताह से एक और जटिल समस्या से जूझ रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा पिछले लगभग एक सप्ताह से टोकन में करेक्शन करने का ऑप्शन लॉक कर दिया गया है। जिससे खाद विक्रय करने वाली प्राथमिक साख सहकारी समिति या निजी खाद विक्रेता टोकन में खाद की मात्रा कम नहीं कर पा रहे हैं। जिस किसान का जितनी बोरी का टोकन निकल रहा है, उसे उतनी ही बोरी खाद लेना अनिवार्य है। सहकारी बैंकों से लोन पर खाद लेने वाले कुछ किसानों को तो उनकी बैंक लिमिट से अधिक राशि की खाद का टोकन जनरेट हो रहे हैं, जो स्वत: ही निरस्त हो रहे हैं। जिले में पिछले लगभग एक माह से डीएपी खत्म हो गई है। इसके बदले किसानों को लगभग दोगुनी मूल्य की एनपीके खाद लेना मजबूरी बन गया है। बोवनी करने के कीमती समय में किसान टोकन कटवाने और खाद की व्यवस्था करने में ही जुटा है।
खाद विक्रेताओं के पास था करेक्शन का ऑप्शन
उर्वरक विक्रय के लिए टोकन सिस्टम एक अप्रैल से अनिवार्य हो गया है। टोकन सिस्टम लागू होने के बाद किसानों की फार्मर आईडी में दर्ज कुल जमीन और किसान द्वारा बोई गई फसल के हिसाब से खाद मिलती है। खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन आदि के लिए प्रति हेक्टेयर 3 बोरी डीएपी, ५ बोरी यूरिया खाद निर्धारित है। वहीं गन्ना के लिए प्रति हेक्टेयर १५ बोरी यूरिया और ५ बोरी डीएपी खाद मिल रही है। किसानों द्वारा ऑनलाइन टोकन लेने पर उन्हें मिलने वाली कुल खाद के टोकन खाद की उपलब्धता के आधार पर मिल जाते हैं। एक सप्ताह पहले तक सहकारी समितियों और प्रायवेट खाद विक्रेताओं को किसान की मर्जी से टोकन से खाद की मात्रा कम करने का ऑप्शन था। यदि किसान को उसे मिले टोकन से कोई खाद की बोरी नहीं लेना होता था तो वह कम करवा सकता है।
लॉक हुआ करेक्शन का ऑप्शन
पिछले लगभग एक सप्ताह से निजी खाद विक्रेताओं के साथ ही प्राथमिक साख सहकारी समितियों में भी अब करेक्शन का ऑप्शन लॉक कर दिया गया है। जिससे अब किसान को जितनी खाद का टोकन मिला है उतनी पूरी खाद लेना अनिवार्य है। यदि किसान उस प्राप्त टोकन से कम मात्रा में खाद लेना चाहे तो यह संभव नहीं है, जिससे किसानों को पूरा टोकन ही कैंसिल करवाने मजबूर होना पड़ रहा है।
डीएपी के बदले दे रहे एनपीके
जिले में पिछले एक माह से अधिक समय से डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है। डीएपी के बदले किसानों को अलग-अलग कम्पोजिशन की एनपीके खाद दी जा रही है, जो किसानों को लगभग दोगुनी महंगी पड़ रही है। डीएपी की एक बोरी का दाम १३५० रूपए है। इसके बदले दी जा रही एनपीके के दाम अलग-अलग संयोजन के हिसाब से न्यूनतम 1990 रूपए से लेकर अधिकतम 2४५० रूपए प्रति बोरी तक है। किसानों को एनपीके की अधिक बोरी के टोकन दिए जा रहे है। जिससे उनका खाद का बजट बढ़ रहा है।
लिमिट से अधिक राशि के मिल रहे टोकन
प्राथमिक साख सहकारी समितियों के माध्यम से सहकारी बैंकों से लोन पर खाद लेने वाले किसानों को सर्वाधिक परेशानी हो रही है। सहकारी बैंकों द्वारा उर्वरक के लिए प्रति हेक्टेयर १२ हजार २०० रूपए की लिमिट निर्धारित है। किसानों को इस राशि से अधिक की खाद नहीं मिल सकती है। डीएपी के बदले एनपीके देने से किसानों का बजट बढ़ रहा है। घोड़ाडोंगरी के किसान रविन्द्र नवड़े ने बताया कि उनकी ५ हेक्टेयर जमीन है। उनका खाता प्राथमिक साख सहकारी समिति घोड़ाडोंगरी में है। उन्होंने धान की फसल के लिए २६ जून को टोकन लिया। उन्हें एनपीके २०:२०:0:१३ उर्वरक की ३० बोरी और १० बोरी यूरिया का टोकन मिला। ३० बोरी एनपीके की कीमत ६३ हजार रूपए और १० बोरी यूरिया की कीमत २६६५ रूपए थी। उनकी कुल खाद ६५ हजार ६६५ रूपए की हुई। जब वे टोकन लेकर सहकारी समिति गए तो उन्हें बताया गया कि उनकी लिमिट ६० हजार रूपए की ही है। खाद की मात्रा कम करने का ऑप्शन लॉक है, जिससे उन्हें ६५ हजार ६६५ रूपए की खाद नहीं दी जा सकती है। मजबूरी में उनका टोकन निरस्त करना पड़ेगा।
यह व्यथा अकेले रविन्द्र की नहीं है। जिले के अधिकतर किसानों को इसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। उर्वरक नहीं मिलने से किसान बोवनी शुरू नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने टोकन सिस्टम को किसानों की सहूलियत के हिसाब से संचालित करने की मांग की है।

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