Orthopedic Surgery Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बिल्डिंग निर्माण, फर्नीचर खरीदी सहित अन्य अनावश्यक सामग्रियों पर करोड़ों रूपए खर्च करने वाले स्वास्थ्य महकमे के पास हड्डी के ऑपरेशन में लगने वाले विभिन्न सामान खरीदने के लिए कुछ हजार रूपए नहीं है। सामान के अभाव में जिला अस्पताल में कोविड काल के बाद से ही हड्डी के किसी भी प्रकार के ऑपरेशन होना बंद हो गए हैं। जिला अस्पताल में आर्थोपेडिक थियेटर भी है, लेकिन प्रति ऑपरेशन औसतन ५ से ६ हजार रूपए तक लगने वाले सामान के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। एक्सीडेंट, सहित अन्य हादसों में हड्डी टूटने वाले मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें या तो भोपाल रेफर होना पड़ता हैं या फिर जिले के ही प्रायवेट अस्पतालों में हजारों रूपए खर्च करके ऑपरेशन करवाने मजबूर होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल से प्रतिमाह २०० से २५० मरीज ऑपरेशन करवाने अन्य अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।

कोविड के पूर्व तक होते थे ऑपरेशन

जिला अस्पताल में २०१९ में आए कोविड काल के पहले तक हड्डी संबंधित बीमारियों के ऑपरेशन होते थे। पुराने जिला अस्पताल का भवन और ओटी भले ही छोटी थी, लेकिन यहां स्पाइनल, टीकेआर, टीएचआर, एक्सीडेंट में शरीर के किसी भी भाग की हड्डी फ्रेक्चर होने पर ऑपरेशन जिला अस्पताल में ही हो जाते थे। बड़े ऑपरेशन जैसे हिप ज्वाइंट, नी-रिपलेसमेंट आदि के लिए ही मरीजों को बाहर जाना पड़ता था, लेकिन २०१९ में जिला अस्पताल के नए बड़े भवन में शिफ्ट होने के बाद कोविड संक्रमण आ गया और जिला अस्पताल में हड्डी के ऑपरेशन का सामान आना ही बंद हो गया। कोविड काल बीतने को लगभग ६ साल हो गए, लेकिन जिला अस्पताल में न तो स्वास्थ्य विभाग से सामान आया और ना ही रोगी कल्याण समिति द्वारा स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की व्यवस्था की गई। जिससे हड्डी से संबंधित सभी प्रकार के ऑपरेशन होना बंद हो गए।

प्रतिदिन आते है १० से १२ मरीज

जिले में नागपुर-भोपाल और बैतूल-इंदौर दो फोरलेन सड़क बन गई है। अन्य सड़कों की स्थिति भी ठीक हो गई है, जिससे जिले में प्रतिदिन औसत १५ से २० सड़क हादसे होते हंै। इनमें सर्वाधिक मरीजों की हड्डी फ्रेक्चर होती है, वहीं पेड़ से गिरने, घर में गिरने जैसे अन्य हादसे भी होते रहते है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग १० से १२ मरीज हड्डी संबंधित परेशानियों के आते हैं, लेकिन इनमें से ८ से १० मरीजों को ऑपरेशन की स्थिति होने पर प्रायवेट अस्पतालों या फिर भोपाल रेफर होने मजबूर होना पड़ता है।

आयुष्मान नहीं होने पर बढ़ती है मुसीबत

हड्डी के ऑपरेशन की नौबत आने पर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले अधिकतर मरीज भोपाल जाने में सक्षम नहीं होते हैं। जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड होता है वे जिले के ही प्रायवेट अस्पतालों में उपचार करवा लेते हैं वहीं जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं होता है उन्हें प्रायवेट अस्पतालों में २५ से ५० हजार रूपए खर्च करके ऑपरेशन करवाना पड़ता है। इन मरीजों में अधिकतर गरीब तबके के होते हैं, जो रिश्तेदारों से उधार लेकर या साहूकार से ब्याज पर रूपए लाकर ऑपरेशन करवाने मजबूर होते हैं।

औसतन ६ से ७ हजार रूपए की आती है सामग्री

जिला अस्पताल में ऑपरेशन करने वाले दो हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थ हैं। ऑपरेशन थियेटर भी नया बन गया है, लेकिन हड्डी के ऑपरेशन करने जरूरी सामान प्लेट, नैक, स्क्रू, फिक्स करने वाला सामान, तार सहित अन्य जरूरी सामान नहीं होने से ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हड्डी के ऑपरेशन के लिए औसतन ६ से ७ हजार रूपए का सामान एक मरीज के ऑपरेशन में लगता है। यह बहुत बड़ी रकम नहीं है। यदि अस्पताल प्रबंधन चाहे तो अन्य अनावश्यक खर्चों में कटौती कर रोगी कल्याण समिति से ही हड्डी के ऑपरेशन के लिए सामग्री बुलवा सकता है, ताकि गरीब मरीजों को ऑपरेशन के लिए भटकना न पड़।

प्राथमिक उपचार एवं प्लास्टर तक सीमित है ट्रामा सेंटर

जिला अस्पताल के नवनिर्मित भवन में ट्रामा सेंटर शिफ्ट किया गया है। इसी में हड्डी संबंधित बीमारियों के मरीजों को भर्ती किया जाता है, लेकिन यहां पहुंचने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार के बाद सिर्फ प्लास्टर चढ़ाने तक का ही उपचार होता है। हड्डी में मामूली क्रेक होने, हड्डी के डिशर्लाकेड होने का ही उपचार होता है। ऑपरेशन की नौबत आने पर मरीजों को या तो प्रायवेट अस्पताल जाना पड़ता है या फिर भोपाल जाने मजबूर होना पड़ता है।

स्थानीय स्तर पर हो सकती है व्यवस्था

जिले के जनप्रतिनिधि, अधिकारी और अस्पताल प्रबंधन चाहे तो स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था कर हड्डी के ऑपरेशन का जरूरी सामान उपलब्ध करवा सकते हैं। स्वास्थ्य महकमे से सामान सप्लाई करवाने का प्रयास भी कर सकते हैं ताकि जिला अस्पताल में हड्डी से संबंधित सभी प्रकार के ऑपरेशन हो सके। यदि ऐसा होता है तो यह जिले की गरीब जनता के लिए सबसे बड़ी सौगात होगी।

जिम्मेदार बोले...

कोविड काल के बाद से ही हड्डी के ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान की सप्लाई बंद है। जिससे जिला अस्पताल में हड्डी के ऑपरेशन बंद है। यदि सामान उपलब्ध करवा दिया जाए तो जिला अस्पताल में हड्डी संबंधित ९० प्रतिशत ऑपरेशन किए जा सकते हैं।
- डॉ. रूपेश पद्माकर 
हड्डी रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, बैतूल