VB Giramji Yojana: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। ग्रामीण क्षेत्र के श्रमिकों के लिए आगामी एक जुलाई से नई योजना वीबी जीरामजी योजना लागू होना है। एक जुलाई को अब महज 5-6 दिन ही बचे हैं, लेकिन नई योजना को लेकर अभी तक न कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश शासन से आए हैं और न ही योजना के तहत कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को नई योजना को लेकर अभी तक कोई ट्रेनिंग ही दी गई है। ऐसे में नई योजना को लेकर सस्पेंस बरकरार है कि एक जुलाई से योजना लागू होगी या नहीं। 

गौरतलब है कि ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अभी तक मनरेगा योजना चल रही थी। बीते कई सालों से यह योजना श्रमिकों को उनकी जरुरत के अनुसार रोजगार मुहैया कराती आ रही है। इससे ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों या शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ रहा था। अब केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है कि इसके स्थान पर वीबी जीरामजी (विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण) योजना लागू की जा रही है। नई योजना का क्रियान्वयन एक जुलाई से किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि जमीनी स्तर पर ऐसी कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। 

अमले को नहीं कोई विस्तृत जानकारी

सरकार ने नई योजना का ऐलान तो कर दिया, लेकिन अभी तक कोई जमीनी तैयारी नजर नहीं आ रही है। किसी भी नई योजना को लागू करने के पहले उसके हर पहलू से उस स्टाफ को अवगत कराना जरुरी है, जिसे उस योजना का क्रियान्वयन करना है। अभी तक यही होता भी आया था, लेकिन सरकारी अमले को इस योजना के संबंध में आज तक कोई भी ट्रेनिंग नहीं दी गई है। इससे अधिकारी-कर्मचारियों को खुद ही यह जानकारी नहीं है कि योजना में क्या-क्या बदलाव हुआ है और बदलावों को किस तरह से क्रियान्वित करना है। 

स्पष्ट निर्देशों का भी अभी हो रहा इंतजार

एक ओर जहां अधिकारियों-कर्मचारियों को न तो कोई प्रशिक्षण दिया गया है और न ही योजना को लेकर कोई विस्तृत और स्पष्ट दिशा निर्देश ही आए है कि एक जुलाई से योजना लागू करना है और इस रूप में लागू करना है। इससे अभी तक मनरेगा के स्टाफ को ही यह साफ नहीं है कि एक जुलाई से नई योजना लागू हो ही जाएगी या नहीं। राज्य और केंद्र स्तर पर जरुर एक जुलाई से लागू करने की बातें कही जा रही है, लेकिन जिला, जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी है। 

पुराने चल रहे कामों पर ही पूरा फोकस 

पूर्व में नई योजना को लेकर यह निर्देश आए थे कि मनरेगा के तहत चल रहे जो काम अधूरे हैं, उन्हें 30 जून तक हर हाल में पूरे कर लिए जाए। खासतौर से जीरामजी योजना में जो काम शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें हर हाल में पूरे करना है। ऐसा नहीं होने पर एक जुलाई के बाद उन कार्यों के लिए राशि नहीं मिलेगी। यही कारण है कि पंचायतों का पूरा-पूरा फोकस इन दिनों अधूरे और प्रगतिरत कार्यों को पूरा करने पर है। नई योजना को लेकर कोई भी फिलहाल कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। 

इसलिए भी जरुरी है स्टाफ का प्रशिक्षण

बताया जाता है कि जीरामजी योजना में पहले के मुकाबले कई बदलाव किए गए हैं। अब 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, मजदूरी का भुगतान 15 दिनों की बजाय 7 दिनों में करने का प्रावधान है, 15 दिन में रोजगार उपलब्ध न कराने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाना है। इसके अलावा भी कई तरह के बदलाव योजना में हुए हैं। इन बदलावों से अभी कर्मचारी ही पूरी तरह से वाकिफ नहीं हो सके हैं। ऐसे में उन्हें ट्रेनिंग देना जरुरी है, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हो सका है। 

तैयारी नजर आ रही है और न माहौल है

केंद्र सरकार की इतनी बड़ी योजना एक जुलाई से लागू किए जाने का ऐलान तो किया जा चुका है, लेकिन ऐसा लग ही नहीं रहा है कि इतनी महत्वपूर्ण योजना चंद दिनों बाद लागू होने वाली है। इसके लिए अभी तक न कोई तैयारी नजर आ रही है और न ही ऐसा कोई माहौल ही दिख रहा है। यही कारण है कि सरकारी अमले के साथ ही आम लोगों को भी इस बात को लेकर खासा असमंजस है कि पता नहीं जीरामजी योजना एक जुलाई से लागू हो भी पाती है या नहीं।