कमाई नहीं, सिर्फ कर्ज! MP सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन पर रोज़ 23 करोड़ ब्याज
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के साथ-साथ राज्य के सरकारी संस्थान भी इन दिनों भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (एससीएससी) की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। कॉरपोरेशन की अपनी कोई खास कमाई नहीं हो रही है, लेकिन इसके बावजूद उसे हर दिन सिर्फ ब्याज के तौर पर 23 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है। इस समय कॉरपोरेशन पर कुल 103 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है।
सीजन की कमाई भी ब्याज में हो रही है खत्म
कॉरपोरेशन को मुख्य रूप से धान और गेहूं की खरीदी के सीजन में कमीशन के जरिए अच्छी आमदनी होती है। हालांकि, यह कमाई इतनी भी नहीं है कि इससे कर्ज का मूलधन (वास्तविक कर्ज) चुकाया जा सके। जब रोज का करोड़ों रुपया सिर्फ ब्याज देने में ही चला जा रहा है, तो ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि कॉरपोरेशन इस भारी कर्ज को कब और कैसे चुका पाएगा।
महज दो साल में ढाई गुना बढ़ा ब्याज का बोझ
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2024 में कॉरपोरेशन को हर दिन करीब 9 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ता था। लेकिन पिछले 28 महीनों में यह स्थिति और बिगड़ गई और साल 2026 आते-आते हर दिन दिया जाने वाला यह ब्याज बढ़कर 23.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसे मैनेजमेंट की लापरवाही कहें या मजबूरी, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आने वाले जुलाई महीने तक यह कर्ज 50 करोड़ रुपये और बढ़ सकता है। इस बीच, सत्ता पक्ष के ही भाजपा विधायक विनोद विश्नोई ने बारदाने (बोरे) की खरीदी में भ्रष्टाचार होने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
अधिकारी का दावा: वित्तीय प्रबंधन में कोई कमी नहीं
दूसरी तरफ, लगातार बढ़ते कर्ज और ब्याज के इस मामले पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) रश्मि अरुण शमी का एक अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि कॉरपोरेशन के वित्तीय प्रबंधन में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है और मैनेजमेंट पूरी तरह सही ढंग से काम कर रहा है। उन्होंने दलील दी कि कॉरपोरेशन अब पहले के मुकाबले बहुत बड़े पैमाने पर फसलों की खरीदी कर रहा है। चूंकि यह पूरी खरीदी कर्ज लेकर की जाती है, इसी वजह से कुल कर्ज और उसका ब्याज बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

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