PM Awas Housing Project Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आर्थिक रूप से कमजोर उन लोगों की पक्का घर मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है जिनके पास पट्टे है और न खुद का मकान। नगर पालिका ने पीएम आवास के तहत ऐसे परिवारों के लिए मकान बनाकर उन्हें मुहैया कराने का प्लान तो कर लिया है, लेकिन जिस जमीन पर यह मकान बनने हैं, उसके ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। ऐसे में इन परिवारों की पक्का घर मिलने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। वहीं कोई ठोस हल नहीं निकलने पर नपा को कोई और जमीन भी तलाशना पड़ सकता है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बीएलसी घटक से तो सभी परिचित हैं। इसमें सरकार उन परिवारों को पक्का आवास बनाकर देती है जिनके पास स्वयं की जमीन या पट्टा हो। इसे बीएलसी घटक कहा जाता है। इसमें शहरी क्षेत्र के लिए मकान बनाने ढाई लाख रुपये की सहायता सरकार देती है। इसके अलावा एएचपी घटक, ब्याज पर सब्सिडी और अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग आदि स्कीम भी हैं। इसके अलावा एएचपी घटक यानी अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप में सरकार निजी डेवलपर्स, हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरणों या अन्य एजेंसियों के साथ पार्टनरशिप करके आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) और निम्र आय वर्ग (एलआईजी) परिवारों के लिए किफायती दामों पर मकान बनवाती है। 

बैतूल में भी बना एएचपी का प्लान 

बैतूल जिले में वैसे तो सर्वाधिक लोकप्रिय घटक बीएलसी है, लेकिन सारणी के बाद अब बैतूल में भी नगर पालिका ने एएचपी घटक के तहत पक्के मकान बनाकर मुहैया कराने की योजना बनाई है। यह मकान उन ईडब्ल्यूएस और एलआईजी परिवारों को उपलब्ध कराने हैं, जिनके पास न खुद के प्लॉट हैं और न ही सरकारी जमीन का पट्टा ही उन्हें मिल सका है। इसके चलते उन्हें बीएलसी घटक का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत शहर के 150 ऐसे परिवारों को लाभ देने का प्लान है। 

इस तरह से मिलेगा योजना का लाभ

एएचपी घटक के तहत नगर पालिका द्वारा किसी एजेंसी या फर्म से साझेदारी करके अपार्टमेंट बनवाएगी। उसमें ईडब्ल्यूएस और एलआईजी परिवारों के लिए मकान आरक्षित रखे जाएंगे। यह तैयार फ्लैट या मकान उन्हें आवंटित किए जाएंगे। इससे उन परिवारों को खासी राहत के साथ पक्का मकान मिल सकेगा, जो कि अभी तक इस योजना का लाभ प्लॉट या पट्टा नहीं होने से नहीं बना पाए हैं। 

कितनी देना होगा मकान की कीमत 

इस योजना में पात्र परिवारों को मकान  पूरी तरह मुफ्त में नहीं मिलेगा। सरकार द्वारा अपनी ओर से पीएम आवास के तहत जितनी राशि दी जाती है, वह 2.50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इसके बाद मकान की लागत राशि में से जितनी राशि बचेगी, उसे अदा करने के लिए किस्त बांध दी जाएगी। इस तरह बेहद रियायती दामों पर इन परिवारों को मकान उपलब्ध हो जाएंगे। हालांकि बैतूल में यह सपना सच होना इतना आसान नहीं लग रहा है। 

बैलगाड़ी प्रोजेक्ट की जमीन पर प्रस्तावित 

बैतूल में एएचपी घटक के तहत पीएम आवास हमलापुर में पूर्व में बैलगाड़ी प्रोजेक्ट के लिए दी गई जमीन पर प्रस्तावित है। यहां 8 से 10 एकड़ जमीन है जो कि इसी योजना के लिए नगर पालिका को दी जा चुकी है। सालों पहले यह जमीन नगर पालिका को मिल चुकी है, लेकिन इस पर एएचपी घटक के तहत आवास बनाने की योजना अब कहीं बन सकी है। यह बात अलग है कि अब नपा के अफसरों ने इस जमीन का मुआयना किया तो यहां एक बड़ी समस्या देखने को मिल रही है। 

जमीन के बीच से हाईटेंशन लाइन 

दरअसल, इस जमीन के बीच से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। यह लाइन भी किसी एक तरफ से नहीं गई है बल्कि एक तरफ दाहिने कोने से गई है तो दूसरी ओर बाए कोने पर पहुंची है। ऐसे में तिरछे आकार में यह पूरी जमीन घेर रही है। इससे किसी ओर छोड़ कर भी अपार्टमेंट बनाना फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है कि नगर पालिका के इंजीनियर इन दिनों यही माथा पच्ची कर रहे हैं कि यहां पर आखिर कैसे अपार्टमेंट बनाएं। यदि कोई उपाय या हल नहीं निकला तो फिर नगर पालिका को दूसरी कोई जमीन की तलाश करना होगा। 

बैतूल में वैसे सफल नहीं यह योजना 

इस तरह की योजना वैसे बैतूल जिले में बहुत ज्यादा सफल होती भी नहीं है। हाउसिंग बोर्ड ने भी पहले कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने कोसमी में एक कॉलोनी बनाई थी। इसमें रियायती दामों पर वन बीएचके और टू बीएचके के फ्लैट उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन वहां किसी ने खास रूचि नहीं दिखाई। हालांकि उसका एक कारण उस कॉलोनी का शहर और सुविधाओं से बहुत दूर होना भी रहा, लेकिन इसी तरह का हाल सारणी में नपा द्वारा एएचपी घटक के तहत बनाए जा रहे मकानों का भी हो रहा है।