BHIM App की रफ्तार तेज, 11 महीनों में ट्रांजैक्शन तीन गुना बढ़े
नई दिल्ली: भारत में कैशलेस इकोनॉमी (नकद-रहित अर्थव्यवस्था) अब आम नागरिकों की जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुकी है। जेब में कैश रखने के बजाय मोबाइल से स्कैन कर भुगतान करने के बढ़ते चलन के बीच एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (NBSL) के 'भीम (BHIM) ऐप' ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 11 महीनों के भीतर इस स्वदेशी भुगतान प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस की तादाद में तीन गुना से भी ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जून 2025 से मई 2026 के बीच आंकड़ों में भारी उछाल
बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, जून 2025 से लेकर मई 2026 के बीच भीम ऐप के उपयोग में अभूतपूर्व तेजी आई है। अगर आंकड़ों की तुलना करें तो:
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वॉल्यूम में बढ़त: जून 2025 में जहां इस ऐप के माध्यम से 7.96 करोड़ (79.64 मिलियन) ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे, वहीं मई 2026 में यह ग्राफ तेजी से चढ़कर 24.4 करोड़ (244 मिलियन) पर जा पहुंचा।
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लेन-देन की कुल कीमत: सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना है। अकेले मई 2026 के महीने में उपभोक्ताओं ने भीम ऐप के जरिए कुल 26,952 करोड़ रुपये की धनराशि का डिजिटल ट्रांसफर किया।
रोजमर्रा की किन चीजों पर सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं लोग?
राष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा यह डिजिटल बदलाव राज्यों में भी समान रूप से प्रभावी है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना में भी इसी 11 महीने की अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तीन गुना हो चुका है।
मई 2026 में हुए कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शंस (व्यापारिक भुगतानों) का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए सबसे ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट का सहारा ले रहे हैं:
| श्रेणी (Category) | कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में हिस्सेदारी |
| किराना और राशन की खरीदारी | 23.9% |
| फूड आउटलेट्स (होटल और रेस्टोरेंट) | 18.1% |
| क्विक कॉमर्स (तत्काल डिलीवरी सेवाएं) | 11.6% |
एनबीएसएल की एमडी और सीईओ ललिता नटराज के अनुसार, रूटीन खरीदारी के लिए इस ऐप की बढ़ती स्वीकार्यता यह साफ दर्शाती है कि उपभोक्ता अब पारंपरिक नकदी को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
कम इंटरनेट और क्षेत्रीय भाषाएं बनीं ग्रामीण भारत में सफलता की चाबी
भीम ऐप की इस कामयाबी के पीछे इसकी सुलभ और यूजर-फ्रेंडली तकनीक का बहुत बड़ा हाथ है। कंपनी का मुख्य ध्यान ऐसे डिजिटल उत्पाद तैयार करने पर रहा है जो बिना किसी तकनीकी बाधा के हर वर्ग के लिए सुरक्षित और आसान हों।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी (Semi-urban) इलाकों में इस ऐप की पैठ बढ़ने की दो मुख्य वजहें हैं:
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15+ क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट: यह ऐप तेलुगु सहित देश की 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है, जिससे गैर-अंग्रेजी भाषी लोगों के लिए इसे चलाना बेहद सरल हो जाता है।
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लो-कनेक्टिविटी मोड: इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देश के सुदूर गांवों या कम इंटरनेट स्पीड (Low Internet Connectivity) वाले क्षेत्रों में भी यह ऐप बिना अटके काम कर सके।
भविष्य की मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था का संकेत
भीम ऐप के ट्रांजैक्शन में आई यह ऐतिहासिक तेजी भारत की जमीनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के मजबूत ढांचे को प्रमाणित करती है। छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े फूड चेन तक इसका बढ़ता उपयोग और टियर-2 व टियर-3 शहरों में इसकी मजबूत पकड़ यह साफ इशारा करती है कि आने वाले समय में देश के ग्रामीण अंचलों में भी कैशलेस ट्रांजैक्शन का दायरा और अधिक व्यापक और सुदृढ़ होने वाला है।

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