विपक्षी दलों से कांग्रेस की अपील, बोली- एकजुटता ही जीत की कुंजी
नई दिल्ली| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शन को युवाओं के भीतर पनप रहे भारी असंतोष का नतीजा करार दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रदर्शनों और आंदोलनों के बलबूते लोकतांत्रिक व्यवस्था को नहीं चलाया जा सकता। किसी भी जनहित के मुद्दे को तार्किक परिणति तक पहुँचाने का अंतिम उत्तरदायित्व राजनीतिक दलों और उनके संगठनों पर ही होता है।
आंदोलन ने युवाओं की चिंताओं को मंच दिया
एक हालिया बातचीत में रमेश ने उल्लेख किया कि सीजेपी को लेकर बाजार में कई तरह की अटकलें हैं। कुछ लोग इसके पीछे किसी अदृश्य ताकत का हाथ मान रहे हैं, तो कुछ इसे छात्रों के स्वाभाविक गुस्से के रूप में देख रहे हैं। हकीकत चाहे जो भी हो, इस अभियान ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है और नौजवानों की आवाज को बुलंद किया है। उन्होंने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है, इसलिए युवाओं के इस संघर्ष को आगे बढ़ाने का काम स्थापित सियासी पार्टियों को ही करना होगा।
देशभर में मुख्य विपक्षी दल का जन-संवाद कार्यक्रम
मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में हुई गड़बड़ियों और देश की ढर्रे पर चल रही शिक्षा प्रणाली के खिलाफ कांग्रेस ने एक राष्ट्रव्यापी मोर्चा खोल रखा है। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बिहार के पटना में भी इसी तरह के छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह पूरा अभियान जुलाई के महीने में देश की राजधानी दिल्ली में संपन्न होगा। रमेश ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पेपर लीक या बोर्ड परीक्षाओं की कमियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की विश्वसनीयता, सरकारी बजट और अंधाधुंध निजीकरण जैसी बुनियादी समस्याओं के खिलाफ है।
सरकारी बजट से भारी पड़ रही कोचिंग सेंटरों की फीस
कांग्रेस नेता ने कोटा में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए एक गंभीर मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के आम परिवार अपने बच्चों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों को जितना पैसा दे रहे हैं, वह भारत सरकार के कुल शिक्षा बजट से भी कहीं ज्यादा है। यह आंकड़ा देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद गहरी असमानता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कोचिंग सेंटरों का यह जाल इतना मजबूत क्यों हो गया और मेडिकल की पढ़ाई आम आदमी की पहुंच से बाहर क्यों होती जा रही है? गौरतलब है कि देश के करीब 20 लाख से अधिक छात्रों ने रविवार को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा दी है।
जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
दूसरी तरफ, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद पर अड़े हुए हैं। अपनी इसी मांग के तहत प्रदर्शनकारी छात्रों ने मंगलवार को एक अनोखा 'डायपर दान अभियान' भी चलाया। छात्रों का कहना है कि जब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री अपने पद से नहीं हटते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण धरना समाप्त नहीं होगा।

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