National Youth Parliament: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। यदि व्यक्ति में प्रतिभा है तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह छोटे से गांव की है या किसी महानगर में रहने वाली है। यह एक बार फिर साबित किया है आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के छोटे से गांव पाढर निवासी डॉ. इशिता दीपक टहेटवार ने। जिन्होंने १७ से १९ जून तक उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने ओजस्वी और प्रभावशाली वक्तव्य से पूरे मंच सहित सभी उपस्थित सहभागियों को प्रभावित किया।

युवा संसद में ''एक राष्ट्र एक चुनाव" विषय पर हुए व्याख्यान में डॉ. इशिता दीपक टहेटवार ने आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में लोकसभा चुनाव के दौरान हुए ७४ फीसदी मतदान से अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि जब अलग-अलग चुनाव और लगभग हर साल कोई ना कोई चुनाव होने के बावजूद आदिवासी बाहुल्य जिले में ७४ फीसदी मतदान हो सकता है तो यदि पांच साल में सिर्फ एक बार मतदान हुआ तो यह आंकड़ा ९० फीसदी तक पहुंच सकता है।

उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती नेहा जोशी के विशेष प्रयासों से दून विश्वविद्यालय देहरादून में १७ से १९ जून तक तीन दिवसीय युवा संसद का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से चुनिंदा २०० युवाओं को आमंत्रित किया गया था। सभी आमंत्रित युवाओं ने ''एक राष्ट्र एक चुनाव" विषय पर बेबाकी से अपनी बात रखी। इस गरिमामय युवा संसद में डेंटल कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रही डॉ. इशिता दीपक टहेटवार ने मप्र का नेतृत्व किया।

इस युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. इशिता टहेटवार ने देश भर से आए प्रतिनिधियों के बीच एक राष्ट्र एक चुनाव विषय के साथ ही राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बेबाक, तार्किक एवं प्रखरता से अपने विचार प्रस्तुत किए। युवा संसद के मंच पर डॉ. इशिता ने लोकतंत्र, युवा सशक्तिकरण, शिक्षा तथा राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर अपने विचार रखते हुए युवाओं की भूमिका को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। उनके आत्मविश्वास पूर्ण प्रस्तुतिकरण और उत्कृष्ट वक्तृत्व कला से हाल कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने डॉ. इशिता की मुक्त कंठ से सराहना की। होनहार डॉ. इशिता पाढर निवासी महिला एवं बाल विकास विभाग से सेवानिवृत्त श्रीमती सुमन टहेटवार की नातिन, एडव्होकेट दीपक टहेटवार एवं शिक्षिका शोभना टहेटवार की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि से गांव में हर्ष व्याप्त है।