Betul Trenching Ground: बिजली बिना ट्रेंचिंग ग्राउंड कैसे होगा शुरू? मशीनें पहुंचीं, व्यवस्था अब भी अधूरी
Betul Trenching Ground: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका द्वारा कढ़ाई ग्राम क्षेत्र में ट्रेंचिंग ग्राउंड शिफ्ट करने का फैसला तो ले लिया गया, लेकिन लगता नहीं कि यह महत्वपूर्ण फैसला लेने से पहले पर्याप्त होमवर्क किया हो। यही वजह है कि यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाने का काम तो शुरू कर दिया गया है और मशीनें भी पहुंचना शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक बिजली पहुंची ही नहीं है। यहां करीब आधा दर्जन भारी-भरकम मशीनें लगेंगी और इन सबके लिए बिजली सबसे पहले चाहिए।
बीते कई सालों से पूरे शहर का कचरा गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा किया जा रहा था। इससे वहां कचरे के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ खड़े हो गए थे। इस कचरे से उठने वाली बदबू और गंदगी के कारण आसपास के रहवासियों का जीना मुहाल हो गया था। यही कारण है कि क्षेत्रवासी ट्रेंचिंग ग्राउंड को यहां से हटाने की की मांग लंबे समय से कर रहे थे। लगातार हो रहे जन आंदोलन और फिर इसी बीच इस जमीन पर राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनाए जाने की योजना के चलते ट्रेंचिंग ग्राउंड को यहां से अन्यत्र शिफ्ट करना बेहद जरुरी हो गया था। इसी के चलते कढ़ाई ग्राम पंचायत क्षेत्र में नगर पालिका ने पूर्व में मिली जमीन पर ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाए जाने का निर्णय लिया है।
ट्रेंचिंग ग्राउंड का काम हो चुका शुरू
नगर पालिका ने यहां पर ट्रेंचिंग ग्राउंड का स्ट्रक्चर बनाने के लिए काम भी शुरू कर दिया है। शहर से जमा होने वाले कचरे को पृथक-पृथक करने और उसकी प्रोसेसिंग करने के लिए यहां पर मशीनें पहुंचना भी शुरू हो चुका है। अभी तो यहां कचरा नहीं पहुंचाया जा रहा है, लेकिन स्थितियां कुछ ऐसी बन रही हैं कि संभवत: अगले कुछ दिनों में यहां कचरा पहुंचना भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में नगर पालिका भी चाह रही है कि जल्द ही यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड शुरू हो जाए।
मशीनें पहुंचना हो चुका है शुरू
एक ओर जहां नगर पालिका यहां तेजी से स्ट्रक्चर का काम कर रही है वहीं दूसरी ओर यहां विभिन्न कार्यों के लिए लगभग आधा दर्जन विभिन्न मशीनें भी लगना है। इनमें ट्रोमल मशीन, सेग्रीगेशन मशीन, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सिस्टम, फटका मशीन सहित अन्य मशीनें शामिल हैं। इनमें से कुछ मशीनें पहुंच चुकी हैं तो कुछ जल्द ही पहुंचने वाली हैं।
बिना बिजली नहीं चलती कोई मशीन
यह कोई भी मशीन ऐसी नहीं है जो कि बिना बिजली के चल सके। हर मशीन के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। बताया जाता है कि कुछ मशीनें तो इतनी भारी-भरकम है कि इन्हें हाईटेंशन लाइन की ही जरुरत पड़ती है। जाहिर है कि बिना बिजली के यहां पर कोई भी प्रक्रिया आगे बढ़ पाना संभव नहीं है। यही कारण है कि यदि ट्रेंचिंग ग्राउंड को शुरू करना है तो पहले बिजली की व्यवस्था की जाना था।
एक किमी दूर से लाना होगा बिजली
दरअसल, प्रस्तावित ट्रेंचिंग ग्राउंड आबादी से दूर जंगल में स्थित है। यही कारण है कि यहां पर आसपास से बिजली के तार नहीं गुजरे हैं। यहां सबसे करीब बिजली की व्यवस्था करीब 1 किलोमीटर दूर उड़दन में बने वुडन क्लस्टर के पास ही है। यहां से नगर पालिका को करीब 1 किलोमीटर दूर तक बिजली ले जाना होगा। इसके बाद कहीं विधिवत ट्रेंचिंग ग्राउंड शुरू हो सकेगा। बिजली के पहुंचने तक यहां पर कचरे का ढेर ही लगता रहेगा।
तत्काल बिजली की व्यवस्था असंभव
इन हालातों में यह संभव नहीं है कि बिजली की व्यवस्था तत्काल हो सके। वैसे भी बिजली की व्यवस्था में कितना समय लग सकता है उसका अंदाजा हाल ही में अभिनंदन सरोवर के पीछे की दुकानों में बिजली कनेक्शन देने के लिए ट्रांसफार्मर लगने में लगे समय को देखकर लगाया जा सकता है। इसके लिए महीनों इंतजार करना पड़ा। इसी तरह गौठाना ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा साफ करने वाले ठेकेदार का तो काम भी खत्म हो गया पर आज तक उसका ट्रांसफार्मर इंस्टाल नहीं हो पाया।
इसलिए जल्द करना है ट्रेंचिंग ग्राउंड शिफ्ट
गौरतलब है कि वर्तमान ट्रेंचिंग ग्राउंड के स्थान पर राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनना है। इसके लिए नगर पालिका की विशेष बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। वहीं संभावना जताई जा रही है कि 30 जून को स्टेडियम निर्माण के लिए भूमिपूजन भी किया जा सकता है। अभी तो शहर से निकल रहा कचरा पुराने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ही पहुंच रहा है, लेकिन यदि भूमिपूजन होना रहेगा तो न केवल कचरा यहां पहुंचाना बंद करना होगा, बल्कि यहां मौजूद थोड़ा-बहुत कचरा भी जल्द हटाना होगा।

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