Betul Mandi Tax Hike: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। राज्य शासन ने हाल ही में मंडी टैक्स को बढ़ाकर एक रुपये से डेढ़ रुपये करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से गल्ला व्यापारी बेहद नाराज हैं। यही कारण है कि उन्होंने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के विरोध में मंगलवार को व्यापारी हड़ताल पर रहेंगे। इसके चलते मंगलवार को कृषि उपज मंडी बैतूल में किसी भी तरह का नीलामी का कार्य नहीं होगा। व्यापारियों की मांग है कि मंडी टैक्स को यथावत रखा जाए और पहले से भी और कम किया जाएं। 

कृषि उपज मंडियों में होने वाली कृषि उपज की खरीदी-बिक्री पर मंडी प्रशासन द्वारा शुल्क वसूल किया जाता है। यह मंडी टैक्स या मंडी शुल्क कहलाता है। इसकी वसूली व्यापारियों से की जाती है। व्यापारी द्वारा यदि 100 रुपये का कारोबार किया गया है तो उससे अभी तक 1 रुपये का शुल्क लिया जाता था। इसके अलावा 20 पैसे निराश्रित शुल्क भी लिया जाता है। इस तरह कुल 1.20 रुपये का शुल्क व्यापारियों को अदा करना पड़ता है। हाल ही में राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि मंडी शुल्क को 1 रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये कर दिया जाए। राज्य शासन के निर्णय के बाद 16 जून से बढ़ी हुई दर के आधार पर व्यापारियों से मंडी प्रबंधन ने वसूली भी शुरू कर दी है। दर में बढ़ोतरी के बाद अब व्यापारियों को कुल 1.70 रुपये देना पड़ रहा है। 

महाराष्ट्र में वसूल रहे मात्र 80 पैसे 

राज्य शासन द्वारा मंडी शुल्क में बढ़ोतरी किए जाने से व्यापारी खासे नाराज हैं। व्यापारी प्रतिनिधि और मंडी के प्रमुख व्यापारी प्रमोद अग्रवाल कहते हैं कि महाराष्ट्र में अभी भी मात्र 80 पैसे शुल्क वसूला जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार को किसानों की चिंता है, इसलिए उसने आज तक शुल्क में भारी भरकम बढ़ोतरी नहीं की। व्यापारी भी कोई अपनी जेब से मंडी शुल्क नहीं देते हैं। वे यह शुल्क किसानों से ही वसूलते हैं। इसलिए दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। यही कारण है कि व्यापारी इस शुल्क में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। अपना विरोध जताने ही कल व्यापारी हड़ताल पर रहेंगे। 

मंगलवार को बंद रहेगी बैतूल मंडी 

व्यापारियों की हड़ताल के चलते मंगलवार को मंडी में कृषि उपजों की खरीदी-बिक्री नहीं होगी। व्यापारियों से इस संबंध में सूचना मिलने पर मंडी प्रबंधन ने भी किसानों के लिए सूचना जारी कर दी है ताकि किसान अपनी उपज लेकर मंडी न आए और परेशानी का सामना न करें। मंडी प्रबंधन ने कृषकों को सूचित किया है कि कल 23 जून को व्यापारी संघ द्वारा आयोजित हड़ताल के कारण मंडी में समस्त नीलम कार्य बंद रहेगा। अत: वे अपनी उपज लेकर कल न पहुंचे। 

पहले वसूलते थे 2.20 रुपये शुल्क 

पहले मध्यप्रदेश में 2 रुपये मंडी शुल्क लिया जाता था। इस तरह कुल 2.20 रुपये मंडी शुल्क वसूला जाता था। इसके बाद इसे कम करके 1.50 रुपये और फिर विधानसभा चुनाव के पहले 1 रुपये कर दिया था। अब एक बार फिर इसे बढ़ाकर डेढ़ रुपये कर दिया गया है। यह किसानों के लिए नुकसानदेह साबित होगा। मंडी शुल्क बढ़ाए जाने से सरकार का तो खजाना भर जाएगा, लेकिन किसानों को होने वाली आमदनी में कमी होगी। 

मंडी में कम होगी उपज की आवक

व्यापारी सुभाष राठौर बताते हैं कि पहले जब मंडी शुल्क अधिक था तो इससे बचने के लिए बिचौलिए बाहर के बाहर ही बड़े पैमाने पर कृषि उपज खरीदकर और बिना टैक्स चुकाए बाहर भिजवा देते थे। इससे मंडी की आवक में भारी गिरावट आ जाती है। सरकार ने जब मंडी शुल्क में कमी की तो मंडी में आवक भी बढ़ गई थी। अब सरकार ने फिर से इसमें इजाफा कर दिया है तो एक बार फिर मंडी में होने वाली आवक में गिरावट होने लगी है। यहां कम आमदनी होने के डर से किसान भी बाहर ही अपनी उपज बेच देने में यकीन करेंगे। इसी तरह बिचौलिए भी किसानों से खरीदा माल यहां मंडी लाने के बजाय बाहर से ही भिजवा दिया करेंगे। इससे दर बढ़ने के बावजूद मंडी की आमदनी में गिरावट आएगी। 

बांग्लादेशियों के लिए शुरू हुआ था टैक्स

मंडी शुल्क के साथ जो निराश्रित शुल्क लिया जाता है, वह शुल्क वर्ष 1971 और उसके बाद बड़ी संख्या में जो बांग्लादेशी शरणार्थी आए थे, उनके भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वसूलना शुरू किया गया था। उसके बाद वे वापस भी चले गए, लेकिन निराश्रित शुल्क की वसूली आज तक भी बंद नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि अब यह शुल्क सामाजिक सुरक्षा के लिए खर्च किया जाता है। शासन द्वारा जो वृद्धावस्था और दिव्यांगजन पेंशन आदि प्रदान की जाती है, वह इसी शुल्क से वसूल राशि से प्रदान की जाती है। 

मंडी शुल्क के रूप में मिली थी 12 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि 

कृषि उपज मंडी बैतूल ए ग्रेड की मंडी है। वैसे तो जिले में और भी उप मंडियां हैं, लेकिन सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण मंडी होने से यहां प्रतिस्पर्धा अधिक रहती है। यही कारण है कि यहां जिले भर से किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। वर्ष के अधिकांश महीनों में खासतौर से सीजन के दौरान यहां पूरा मंडी परिसर कृषि उपज से खचाखच भरा रहता है और पांव रखने तक को जगह नहीं रहती। भारी भरकम आवक से मंडी को आमदनी भी जमकर होती है। वर्ष 2025-26 में ही बैतूल मंडी को शुल्क के रूप में 12 करोड़, 3 लाख, 60 हजार, 504 रुपये की आय हुई थी। यदि मंडी शुल्क में कमी नहीं की जाती है तो यही आय 18 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।