Betul Plantation Drive: बैतूल में पौधारोपण के नाम पर खानापूर्ति! 2-3 फीट की दूरी पर लगाए जाएंगे आम-पीपल के पौधे
Betul Plantation Drive: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। पर्यावरण संरक्षण व पौधारोपण के नाम पर जिले में अधिकांश संगठन ही नहीं बल्कि सरकारी विभाग केवल रस्म अदायगी ही करते हैं। यह बात अलग है कि कुछ संगठन जहां सोशल मीडिया पर इस बहाने पर्यावरण प्रेमी व संरक्षक का तमगा हासिल कर लेते हैं तो सरकारी विभाग अपनी फाइलें मोटी करके लाखों रुपये का खर्च दिखाने में कामयाब हो जाते हैं। पर्यावरण की सच्ची सेवा का उद्देश्य इसमें कहीं भी नजर नहीं आता। बैतूल नगर पालिका भी इसी बात को हर साल चरितार्थ करती नजर आती है। यदि इसका जीता-जागता नमूना देखना हो तो शहर के फिल्टर प्लांट परिसर में इस साल पौधारोपण के लिए की गई तैयारी को देख कर देखा जा सकता है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मध्यप्रदेश से इस साल बैतूल नगर पालिका को 500 पौधे रोपने का लक्ष्य दिया गया था। यह पौधे 21 जून तक रोपे जाने थे। इसके लिए नगर पालिका बैतूल ने 3 स्थानों का चयन किया था। इनमें अभिनंदन सरोवर, क्रीड़ा परिसर और फिल्टर प्लांट परिसर शामिल है। बीच में थोड़ी बारिश होने जाने पर नगर पालिका द्वारा 2 स्थानों अभिनंदन सरोवर और क्रीड़ा परिसर में पौधारोपण किया भी जा चुका है। इस बीच बारिश बंद हो जाने और जल्द ही बारिश होने के आसार नहीं नजर आने पर फिल्टर प्लांट परिसर में पौधे नहीं रोपे गए हैं। यहां पूर्व तैयारी के तौर पर दर्जनों गड्ढे खोद कर रख दिए गए हैं। यह गड्ढे ही बता रहे हैं कि नगर पालिका पर्यावरण संरक्षण को लेकर किस तरह महज दिखावा और रस्म अदायगी कर रही है।
महज दो से तीन फीट दूर हैं गड्ढे
यहां दर्जनों गड्ढे तो खोद दिए गए हैं, लेकिन एक भी गड्ढे की गहराई एक फीट से ज्यादा नहीं है। अधिकांश गड्ढे तो एक फीट गहरे भी नहीं है। इससे भी बड़ी बात यह है कि फलों के आकार के अनुसार दूरी का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया है। लगभग सभी गड्ढे एक-दूसरे से 2 से 3 फीट की दूरी पर है। इक्का-दुक्का गड्ढे ही ऐसे होंगे, जिनकी दूरी 4 से 5 फीट की हो। वहीं नगर पालिका की प्लानिंग इन गड्ढों में जिन पौधों की लगाने की है, उनके नाम सुनकर इस बात का आश्चर्य साधारण लोगों को भी हो रहा है कि इतनी कम दूरी में यह पौधे आखिर यहां कैसे पल और बढ़ पाएंगे।

इन पौधों का किया जाना है यहां रोपण
इस लक्ष्य की पूर्ति करने के लिए नगर पालिका द्वारा आम, पीपल, जामुन और करंजी के पौधे रोपे जा रहे हैं। जाहिर है कि यह सभी पौधे बड़े और मध्यम आकार के होते हैं, जो कि काफी अधिक जगह घेरते हैं। ऐसे में इनके लिए दो पौधों के बीच में मापदंडों के अनुसार दूरी का भी ख्याल रखा जाना जरुरी है। इतनी दूरी पर यदि यह पौधे लगाए जाएंगे तो वे किसी भी हालत में अपने वास्तविक रूप में पल और बढ़ नहीं पाएंगे।
किस पौधे के बीच कितनी दूरी चाहिए
जानकारों का कहना है कि पौधों के बीच की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि कौन सा पौधा लगाया जा रहा है और उसका आकार कितना बड़ा होता है। नीम, बरगद, पीपल, कदंब, अर्जुन के लिए 5 से 8 मीटर, करंज, शीशम, गुलमोहर, अमलतास के लिए 4 से 5 मीटर, आम के लिए 8 से 10 मीटर, अमरूद के लिए 5 से 6 मीटर, नींबू के लिए 4 से 5 मीटर, आंवला के लिए 6 से 8 मीटर की दूरी 2 पौधों के बीच चाहिए। यहां तक कि घनी वनरोपण योजना में भी 3 गुना 3 मीटर या 4 गुना 4 मीटर की दूरी रखी जाती है। ऐसे में यहां का नजारा देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर पालिका ने दूरी के मापदंडों का कितना ध्यान रखा है।
बीते साल भी हुई थी इसी तरह की बर्बादी
बताया जाता है कि नगर पालिका का पौधारोपण को लेकर केवल खर्च दिखाने का यह फंडा कोई नया नहीं है। नगर पालिका फिल्टर प्लांट परिसर सहित अन्य स्थानों पर इसी तरह से हर साल सैकड़ों-हजारों पौधे लगाने का दावा करती है और तगड़ा खर्च भी दिखा देती है, लेकिन इन पौधों को न तो उचित तरीके से लगाया जाता है और न ही उनकी देखरेख पर ही कोई ध्यान दिया जाता है। नतीजतन, कुछ ही दिनों बाद एक भी पौधा जीवित नहीं रह पाता है। बीते साल भी नगर पालिका ने फिल्टर प्लांट परिसर में इसी तरह बेहद पास-पास सैकड़ों की संख्या में पौधे रोपे थे, लेकिन इनमें से एक भी पौधा आज जीवित अवस्था में नहीं है।

पेपर लीक मुद्दे पर पिघली बर्फ, सरकार और विपक्ष में बनी सहमति; कल सदन में हो सकती है चर्चा
'पंजाब को शिक्षा में नंबर 1 बनाया', केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला, पेपर लीक पर भी दिया जवाब
राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी, कहा- पीओके के अलावा किसी मुद्दे पर नहीं होगी बात
फर्जी रोमन थिएटर का 10 साल तक चलता रहा खेल, हजारों रुपये वसूलने के बाद ऐसे खुली पोल
विश्व कप में भारतीय निशानेबाजों का जलवा, ईशा सिंह ने जीता स्वर्ण, मनु भाकर को कांस्य