Betul Fertilizer Theft Case: खाद गोदाम से ढाई लाख की सेंध: सुरक्षा गायब, संदेहों के घेरे में पूरी व्यवस्था
Betul Fertilizer Theft Case: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कहीं ऐसा तो नहीं है कि बागुड़ ही खेत चर रही है....! आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जामठी के गोदाम से करीब 700 बोरी खाद चोरी होने की घटना ने कई सवालों को जन्म दे दिया है। चोर ट्रक और हम्माल लेकर आए और बकायदा गोदाम से सटाकर ट्रक खड़ा किया। करीब ढाई लाख रुपए कीमत की 700 बोरी खाद उड़ाकर चलते बने, लेकिन किसी को कानों-कान तक खबर सिर्फ इसलिए नहीं हुई क्योंकि यहां पर ना तो लाइट की व्यवस्था थी और ना ही चौकीदार को तैनात किया गया था। कुल मिलाकर यह चोरी की घटना किसी को भी हजम नहीं हो रही है और जनमानस सहित विशेषकर किसानों के बीच यह चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर ऐसे खाद की चोरी कैसे की जा सकती है?
सुनियोजित की गई खाद की चोरी
हमने इस खबर की और अधिक पड़ताल करने के लिए गैरेज संचालक एवं ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजू मिश्रा से संपर्क किया। सबसे पहला हमारा सवाल यही था कि क्या गोदाम से 700 बोरी खाद चोरी हो सकती है, वह भी बिना प्रोफेशनल हम्मालों के? इस पर उन्होंने तपाक से कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता है क्योंकि बोरी उठाना और उसे लेकर जाना, उसके बाद उसे ट्रक में छल्ली में जमाना। यह काम आम व्यक्ति कर ही नहीं सकता है। यह काम सिर्फ प्रोफेशनल हम्माल ही कर सकते हैं। हमारे सवालों के बीच एक उत्तर या यूँ कहे कि पुलिस के लिए क्लू मिल गया कि बिना प्रोफेशनल हम्मालों के चोरी की घटना को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता है। इसके बाद हमने दूसरा प्रश्र किया कि 700 बोरी गोदाम से निकालकर ट्रक में जमाने और इसे चोरी करने में कितना वक्त लगा होगा? श्री मिश्रा ने बताया कि इसमें कम से कम 8 से 10 प्रोफेशनल हम्माल शामिल रहे होंगे और इस कार्य को कम से 3 से 4 घंटे लगे ही होंगे। मतलब इतनी देर तक ट्रक गोदाम के दरवाजे पर खड़ा रहा और खाद की बोरियां चोरी होते गई, लेकिन ताज्जुब की बात है कि किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई।
सुरक्षा के कुछ भी नहीं थे इंतजाम
इसके बाद हमारा शक आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जामठी के कर्मचारियों पर गया कि हो सकता है कि उनमें से किसी एक ने इस तरह का कृत्य करने का जोखिम उठाया हो। इसके लिए जब हमने समिति के प्रबंधक अशोक देशमुख से बातों-बातों में शक जाहिर किया तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारी समिति के सभी कर्मचारी बेहद ईमानदार हैं। वह यह कार्य कर ही नहीं सकते हैं। इसके बाद जब उनसे गोदाम में लाइट, सीसीटीवी कैमरे और चौकीदार तैनात करने की बात कही तो वह इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। कुल मिलाकर चोरों के लिए रास्ता और मैदान दोनों साफ था ताकि वह चोरी भी कर ले और उनका विरोध करना तो दूर उनकी रिकार्डिंग तक ना हो सके।

कौन सी खाद कितनी हुई चोरी?
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक अशोक देशमुख ने बताया कि रविवार की रात में आरटीओ आफिस के पास स्थित गोदाम के ताले तोड़कर 668 बोरी यूरिया, 32 बोरी पोटाश और 5 बोरी जिंक की चोरी हुई है। यूरिया की लगभग कीमत 1 लाख 78 हजार रुपए है। पोटाश की कीमत लगभग 57 हजार रुपए और जिंक की कीमत लगभग 10 हजार रुपए की है। श्री देशमुख ने बताया कि रविवार की रात चोरी हुई है। सोमवार को जब खाद वितरण करने के लिए गोदाम पहुंचे तब पता चला कि चोरी हो गई। इसके बाद गोदाम से खाद की बोरियों का मिलान सोमवार की रात तक चला और इस घटना की सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई थी।
पुलिस कर रही घटना की जांच
कोतवाली थाना प्रभारी देवकरण डहेरिया ने बताया कि आरटीओ आफिस के पास आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जामठी के गोदाम से खाद चोरी होने की सूचना मिली थी। मंगलवार को पुलिस ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की। घटना का पंचनामा तैयार किया गया है। खाद की कितनी बोरी चोरी हुई है, इसको लेकर समिति प्रबंधक कोतवाली में जानकारी देने आ रहे हैं और उसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
नहीं थे सीसीटीवी कैमरे
कोतवाली थाना प्रभारी देवकरण डहेरिया ने मौका मुआयना करने के बाद बताया कि इस मामले में प्रथम दृष्टया बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। खाद गोदाम में ना तो सुरक्षा के कोई इंतजाम थे और ना ही कोई गार्ड था। लाइट भी नहीं थी। इसके अलावा समिति के द्वारा वहां पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए थे। हालांकि पुलिस इस पूरे मामले में हर पहलू से जांच कर रही है।
किसानों को नहीं मिला एक भी बोरी
आज स्थिति यह है कि किसानों को बिना ई-टोकन के एक भी बोरी खाद नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं सरकार की व्यवस्था के तहत पट्टाधारी किसान, ग्राम कोटवारों को तक को फार्मर आईडी नहीं बनने से खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में खाद की चोरी होना कई संदेह को जन्म दे रही है। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में खाद की मारामारी की वजह से बाजार में यूरिया की 266 रुपए की बोरी 800 रुपए तक में बिक रही है बल्कि किसान को 800 रुपए में भी खाद की बोरी नहीं मिल रही है। ऐसे में 668 बोरी यूरिया चोरी होना अपने आप में एक बड़ा संदेह पैदा कर रहा है।
स्टॉक मेन्टन करने तो नहीं करवाई चोरी?
प्राथमिक सेवा सहकारी समिति के बैतूल-भोपाल फोरलेन किनारे ग्राम उड़दन स्थित गोदाम में 705 बोरी खाद की चोरी संदेह के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में यह चर्चा है कि समिति में पिछले कई दिनों से खाद के स्टॉक में हेराफेरी हो रही थी। कागजों में और फिजीकल स्टॉक में अंतर आ रहा था, जिसे दूर करने अपने परिचित किसानों के नाम पर खाद बिक्री दिखाकर स्टॉक बराबर करने का खेल चल रहा था। कुछ किसानों का कहना है कि इस साल खाद बिक्री के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू हो गई है। जिससे बिना टोकन के किसी भी किसान को खाद नहीं दी जा सकती है।
संभावना जताई जा रही है कि समिति के ही कुछ कर्मचारियों ने स्टॉक मेन्टेन करने तो चोरी नहीं करवाई है? यह सब पुलिस जांच में सामने आएगा, लेकिन यदि विभागीय स्तर पर भी समिति के स्टॉक का बारीकी से मिलान किया जाए तो गड़बड़ी सामने आ सकती है। क्योंकि फोरलेन किनारे अति व्यस्ततम मार्ग होने, समीप ही सतलोक आश्रम होने से यहां रात भर दुकानें खुली रहती है और लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में चोरों द्वारा घटना को अंजाम देना मुश्किल है। इसलिए 705 बोरी खाद की चोरी किसी के गले नहीं उतर रही है।

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