पंजाब से केरल तक बड़ा उलटफेर, कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तय
नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने और कर्नाटक में सत्ता व नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद, कांग्रेस आलाकमान अब पूरी तरह से आगामी लोकसभा चुनाव और 2027 में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गया है। चुनाव रणनीतियों को धार देने और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस बड़े सांगठनिक फेरबदल की पटकथा लिख चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए पार्टी देश के छह से अधिक प्रमुख राज्यों में अपने प्रदेश अध्यक्ष (PCC चीफ) बदलने जा रही है, साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के स्तर पर भी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्गठन होना तय है।
पंजाब में गुटबाजी रोकने के लिए चन्नी को कमान संभव, केरल में नए चेहरे की तलाश
आगामी फेरबदल की सबसे बड़ी गाज पंजाब कांग्रेस पर गिर सकती है, जहां अगले साल (2027) विधानसभा चुनाव होने हैं। हालिया निकाय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राज्य इकाई में अंदरूनी गुटबाजी और तेज हो गई है। आगामी चुनावों से पहले इस गुटबाजी को रोकने के लिए पार्टी वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कमान सौंपकर दलित कार्ड खेल सकती है।
वहीं, हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस के सामने वहां नया संगठन मुखिया चुनने की चुनौती है। दरअसल, केरल के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ को राज्य कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है। 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत अब उनके स्थान पर नया अध्यक्ष चुना जाएगा। इस रेस में सांसद कोडिकुन्निल सुरेश, बेनी बेहानन, एंटो एंटनी, यूडीएफ (UDF) संयोजक अदूर प्रकाश और वरिष्ठ नेता जोसेफ वझक्कन के नाम तेजी से चल रहे हैं, जहां पार्टी सामाजिक और सामुदायिक (जातीय) समीकरणों को साधने की पुरजोर कोशिश में है।
कर्नाटक और तमिलनाडु में भी नए अध्यक्ष तय
कर्नाटक में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जहां प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार अब मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। ऐसे में वे जल्द ही अध्यक्ष पद छोड़ सकते हैं। उनके स्थान पर वर्तमान मंत्री सतीश जारकीहोली को सबसे मजबूत और अग्रणी दावेदार माना जा रहा है, जबकि वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का नाम भी रेस में बना हुआ है।
इसके अलावा, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई की विदाई भी लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी आलाकमान उनके हालिया कामकाज के तरीके और सांगठनिक फैसलों से संतुष्ट नहीं है, इसलिए वहां किसी नए और आक्रामक चेहरे को मौका दिया जा सकता है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश को लेकर मंथन जारी
हिंदी पट्टी के दो बेहद महत्वपूर्ण राज्यों— राजस्थान और उत्तर प्रदेश को लेकर भी दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के राजनीतिक भविष्य और उनके स्थान पर नए विकल्पों को लेकर आलाकमान मंथन कर रहा है। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पार्टी इन दोनों राज्यों में संगठन को एक नई ऊर्जा और दिशा देने के मूड में है।
इसके साथ ही, आंध्र प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला को लेकर भी बड़ी खबर है। चर्चा है कि उन्हें जल्द ही कर्नाटक कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है, जिसका आश्वासन उन्हें कांग्रेस में शामिल होने के दौरान केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिया गया था। उधर, गोवा कांग्रेस में अंतर्कलह की खबरें आ रही हैं, जहां आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए गिरीश चोडणकर को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने पर राज्य इकाई के कुछ नेता असंतोष जता रहे हैं।
AICC स्तर पर राहुल-खरगे की बड़ी बैठक, युवाओं पर दांव
संगठन को पूरी तरह री-बूट करने के लिए हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबी बैठक हुई है। इस बैठक में कई राज्यों के प्रभारियों के रिपोर्ट कार्ड और उनके कामकाज की समीक्षा की गई, जिनमें से कई प्रभारियों के प्रदर्शन से आलाकमान नाखुश है। सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्तर (AICC) और प्रदेश स्तर, दोनों ही जगह पुराने ढर्रे को बदलकर ऊर्जावान, नए और युवा चेहरों को फ्रंटफुट पर लाने के पक्ष में हैं, ताकि चुनावी मोर्चे पर विरोधी दलों को कड़ी चुनौती दी जा सके।

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