Chana Procurement Irregularities: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। प्रदेश सरकार किसानों को उनका हक दिलाने और उपज के पर्याप्त दाम दिलाने स्वयं करोड़ों रूपए नुकसान उठाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज की खरीदी करती हैं, लेकिन किसानों की सुविधा के लिए की जाने वाली खरीदी ही कुछ लोगों के लिए कामधेनु बन जाती है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में तो अंधेर नगरी चौपट राजा जैसे हालात हो गए हैं।

इसका उदाहरण भीमपुर ब्लॉक में आसानी से देखा जा सकता है जहां बहुउद्देशीय सहकारी साख समिति मर्यादित भीमपुर द्वारा की गई चने की खरीदी राजनैतिक संरक्षण प्राप्त प्रबंधक ने पत्नी के नाम से बनाए गए अपने ही वेयर हाऊस में की है। इतना ही नहीं इस वेयर हाऊस में जब कुछ मीडियाकर्मियों ने चने के बोरे नपवाए तो कुछ बोरों में ५३ किलो तक चना भरा मिला जबकि नियमानुसार बोरी में ५० किलो चना और ५०० से ६०० ग्राम बोरी का वजन सहित अधिकतम ५०.६०० किलो ग्राम चना रहना चाहिये। इससे साफ जाहिर होता है कि समिति प्रबंधन ने भोले-भाले किसानों से प्रति क्विंटल ४ से ५ किलो अधिक चना लेकर किसानों का जमकर शोषण भी किया है।

कृषि को लाभ का धंधा बनाकर किसानों की माली हालत सुधारने के मंत्र पर कार्य कर रही सरकार ओपन मार्केट में उपज के दाम कम होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की उपज खरीदती है। इसके लिए सरकार को करोड़ रूपए का नुकसान भी उठाना पड़ता है, लेकिन किसानों के हित के लिए सरकार नुकसान भी उठती है। सरकार की इस पवित्र मंशा को समर्थन मूल्य खरीदी करने वाले कुछ कर्मचारी अपपनी जेब भरने के चक्कर में पलीता लगा रहे हैं, जो आदिवासी बाहुल्य भीमपुर ब्लॉक में सामने आया है। 

पत्नी के नाम से चला रहे वेयर हाउस 

बहुउद्देशीय सहकारी साख समिति मर्यादित भीमपुर के प्रबंधक नरेन्द्र आर्य द्वारा चना की खरीदी करने कागजों में अपनी पत्नी श्रीमती ममता आर्य के नाम से चल रहे दामजीपुरा स्थित अपने ही बालाजी वेयर हाउस को खरीदी केन्द्र बनाया है। यहां 1 मई से 28 मई तक चना की खरीदी बड़ी मात्रा में की गई है। सूत्रों के अनुसार खरीदी शुरू होने के समय जब ओपन मार्केट में चना के दाम कम थे, तब यहां किसानों से वसूली भी की गई। ओपन मार्केट में जब चना के दाम बढ़ने लगे तो किसानों ने ऊपर के रूपए देने से मना किया तो खरीदी कर रहे कर्मचारियों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया।

जूट के बोरे में की गई खरीदी 

सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी जूट के बोरे में की गई है। एक खाली बोरे का वजन 500 से 550 ग्राम तक होता है। एक बोरे में 50 किलो चना भरना था। अधिकतर खरीदी केन्द्रों पर बोरे सहित 50 किलो 600 ग्राम वजन में खरीदी की गई है। लेकिन आदिवासी बाहुल्य भीमपुर ब्लॉक के दामजीपुरा खरीदी केन्द्र में आने वाले कुछ भोले भाले और अनपढ़ किसानों से 52 से 53 किलो चना तक भरवा लिया गया है। किसानों से प्रति क्विंटल 4 से 5 किलो तक अधिक चना लिया है जो सीधे वेयर हाऊस संचालक की जेब में जाएगा।

यहां रखी चने की बोरियों का रेंडमली तौल करवाने पर इसका खुलासा हो सकता है। 4 से 5 किलो चना अधिक लेने पर किसानों को ढाई सौ से तीन सौ रूपए प्रति क्विंटल की चपत लगी है। मीडियाकर्मियों ने जब बालाजी वेयर हाऊस पहुंचकर कुछ चने के बोरों की तुलाई करवाई तो कुछ बोरियो में 53 किलो 290 ग्राम तक भी चना निकला है। जो निर्धारित वजन से 2 किलो 700 ग्राम अधिक है। इस संबंध में जब खरीदी कर रहे कर्मचारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि नीचे गिरा हुआ चना उठाकर डालने से वजन बढ़ गया है। यदि वेयर हाऊस में खरीदी करके रखे गए चने की रेंडमली ही तुलाई की जाए तो अधिक चना खरीदी करने के मामले का खुलासा हो सकता है।