Amapathar CC Road Scam: नांदा (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले भर की ग्राम पंचायतों में जैसे सरकार पैसे की लूट की होड़ सी लगी है। ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आने वाले पैसों की इस कदर बंदरबांट होती है कि सुविधाओं का कहीं अता-पता नहीं होता और पूरा पैसा खर्च दिखा जाता है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इन योजनाओं और कार्यों पर नजर रखने और गुणवत्ता के साथ काम कराने वाले विभाग भी आंखें मूंदे बैठे रहकर अपना उल्लू सीधा करने से बाज नहीं आते हैं। 

ऐसा ही कुछ नजारा विकासखंड भीमपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पातरी के वन ग्राम आमापठार के हरिजन वार्ड में देखा जा सकता है। यहां आदिवासी बस्ती विकास योजना के अंतर्गत 9 लाख की लागत से बनी सीसी सड़क में इस कदर की धांधली की गई है, जिसकी कोई कल्पना भी शायद ही करें। यहां पुरानी सड़क और जमीन पर सीमेंट का घोल डालकर ही 8 लाख, 45 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। यह कारनामा भी केवल एक सचिव ने कर दिखाया है। 

बेस बनाए बगैर बना दी गई सड़क 

ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पर मात्र 100 मीटर सड़क बनाई गई है। इसके लिए भी विधिवत खुदाई करके बेस नहीं बनाया गया। इसके अलावा शेष जगह पुरानी सड़क के ऊपर ही नई सड़क बना दी गई। पहले यहां पर 14वें वित्त आयोग से सड़क बनाई गई थी। अब इसी पर रस्म अदायगी करके इसे नई सड़क बता दिया गया है। इसके अलावा तराई भी नहीं की गई और ऊपर से मुरम डाल कर छोड़ दी गई है। इससे यह सड़क लंबे समय तक बिल्कुल साथ नहीं दे पाएगी। 

उपयोग की निर्माण सामग्री भी घटिया

ग्राम आमापठार के ग्रामवासियों और पंचों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कि सचिव ने यह काम किसी दूसरे ठेकेदार को ठेके पर दे दिया था। यह सड़क न तो ग्राम के लोगों ने बनाई और ना ही सचिव-सरपंच ने बनाई है। ठेकेदार ने पूरी तरह मनमानी करके सड़क बनाई। सीमेंट की मात्रा बहुत कम डाली गई है और रेता की मात्रा बढ़ा करके सीसी रोड बनाई है। यह रेत भी गुणवत्तापूर्वक नहीं थी, बल्कि काली रेता से बना दी गई। जो कि अधिक समय तक नहीं टिक पाएगी।  

बनते ही उखड़ने लगी नई सड़क 

इस सड़क की गुणवता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीसी रोड तो एक माह पहले बनी है लेकिन यह अभी से उखड़ने लगी है। सभी ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, भीमपुर जनपद सीईओ से सड़क की जांच की मांग करते हुए जिम्मेदारों से रिकवरी किए जाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसा घटिया काम न हो। 

आंख मूंद कर दिया गया मूल्यांकन

पंचायत की इस गड़बड़ी पर आरईएस के इंजीनियर ने भी पूरा सहयोग किया। इतना घटिया काम होने के बावजूद इंजीनियर हेमंत बड़ोदे ने इस कार्य का मूल्यांकन कर दिया। अभी तक स्वीकृत राशि 9 लाख के मुकाबले 8.45 लाख रुपये निकाले जा चुके हैं। इस संबंध में इंजीनियर हेमंत बड़ोदे का कहना है कि इस कार्य की अभी सीसी जारी नहीं हुई है। वहीं एसडीओ विवेक तुमड़ाम का कहना है कि सड़क का कार्य देखने के बाद ही हम कुछ कह सकेंगे।