Betul Under Bridge Project: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिलेवासी पहले सोचते थे कि काश हमारे जिले से भी कोई केंद्र सरकार में मंत्री होता तो हमें न केवल बड़ी-बड़ी सौगातें मिलती बल्कि हमारे किसी काम में कहीं कोई रूकावट भी नहीं आती। दूसरी ओर अब जब जिले से एक केंद्रीय मंत्री हैं तो भी ऐसा नहीं लग रहा कि कोई सौगात मिल रही है या किसी काम में कोई रूकावट नहीं आ रही। स्थिति यह है कि बैतूल शहर के 2 महत्वपूर्ण अंडर ब्रिज की फाइलें बीते 7 महीनों से दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड में धूल खा रही है, लेकिन उन्हें आज तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। 

बैतूल शहर के सदर और गंज क्षेत्र में एक-एक अंडर ब्रिज बनाए जाने हैं। इन दोनों ही अंडर ब्रिजों का लंबे समय से लोग इंतजार कर रहे हैं क्योंकि इनके बनने से रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही आसान होगी। इसके साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था भी सुधर जाएगी। इन अंडर ब्रिजों की प्रक्रिया वर्ष 2024 के आखिर से ही शुरू हो चुकी थी। इसके बाद स्थानीय और फिर नागपुर के रेलवे अधिकारी भी फिजिबिलिटी चेक करके जा चुके हैं। नागपुर स्थित डीआरएम ऑफिस से 7 अक्टूबर 2025 को दोनों अंडर ब्रिजों के प्रस्ताव मुंबई मुख्यालय स्थित महाप्रबंधक कार्यालय को भिजवा दिए गए थे। यहां से चीफ इंजीनियर (ब्रिज) द्वारा एक-दो दिनों बाद जीएडी (जनरल एप्रूव डायग्राम) करके रेलवे बोर्ड दिल्ली को भिजवा दिया था। 

चंद दिनों में मिल सकती थी मंजूरी 

रेलवे बोर्ड में देश भर के प्रस्ताव जाते और थोक में पड़े रहते हैं। हालांकि यहां से मंजूरी मिलना कोई बहुत कठिन नहीं है। जिन क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि रेलवे मंत्री से मिलकर अपने क्षेत्र के कार्यों की प्राथमिकता बता देते हैं और दबाव बनाने में सफल हो जाते हैं, उनके कार्यों को चंद दिनों में मंजूरी मिल जाती है। दूसरी ओर ऐसा नहीं लगता कि केंद्र में जिले से मंत्री होने के बावजूद उन्होंने आज तक इस बारे में कोई पहल की हो। यदि थोड़े भी प्रयास किए जाते तो कब से इन दोनों कार्यों को मंजूरी मिल चुकी होती और अब तक काम भी शुरू हो जाता। इनकी लागत भी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। 

कहां-कहां बनना है यह अंडर ब्रिज 

एक अंडर ब्रिज माचना ब्रिज के पास मालगोदाम के आखिर में बनना है। इसकी लंबाई करीब 120 मीटर है। यह पापुलर सोसाइटी के पास से गुफा मंदिर रोड पर मिलेगा और आगे बैतूल बाजार रोड से जुड़ जाएगा। इससे रामनगर और बैतूल बाजार क्षेत्र के लोग सीधे गंज क्षेत्र में आ सकेंगे। दूसरा ब्रिज सदर में डॉन बॉस्को के पास पुराने रेलवे गेट से थोड़ा आगे बनेगा। इसकी लंबाई करीब 60 मीटर रहेगी। इससे चिचोली क्षेत्र का पूरा ट्रैफिक सीधे गेंदा चौक पर आ सकेगा। इनसे ओवर ब्रिज और गंज अंडर ब्रिज पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। दोनों की लागत करीब 6 करोड़ के लगभग है। 

अब बारिश के बाद ही शुरू होगा काम

दोनों अंडर ब्रिजों को पहले स्वीकृति मिल जाती तो इनका मुख्य काम बारिश से पहले शुरू किया जा सकता था। बताया जाता है कि ट्रैक के बैठ जाने (धंसने) का डर रहने के कारण बारिश में खुदाई नहीं की जा सकती है। अब यदि अभी मंजूरी मिल भी जाएगी तो इनका काम बारिश खत्म होने के बाद ही शुरू हो सकेगा। इससे निर्माण पूरा होने में भी और देरी होगी। यदि जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाते तो यह सुविधा और सौगात पहले मिल सकती थी।