Betul Monsoon Forecast: क्या इस बार बैतूल में रूठ जाएगा मानसून? आईएमडी ने जताई कम बारिश की आशंका
Betul Monsoon Forecast: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। पहले के तमाम पूर्वानुमानों के विपरीत इस साल मानसून की एंट्री देरी से हो रही है। बैतूल जिले पर भी इसका असर साफ नजर आएगा। यहां भी इसके कुछ देरी से 20 जून के बाद सक्रिय होने की संभावना है। यही नहीं इस बार जिले में सामान्य से कम बारिश होने की संभावनाएं भी जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार जिले में 90 प्रतिशत तक ही बारिश होने के आसार है।
भारतीय मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि प्रदेश में इस बार मानसून कमजोर रहेगा। इसका असर कई जिलों में होने वाली बारिश पर पड़ेगा। मौसम विभाग ने प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है। इनमें बैतूल जिला भी शामिल हैं। विभाग के अनुसार बैतूल जिले में 90 प्रतिशत तक ही बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मध्यप्रदेश में मानसून की एंट्री भी 5 से 8 दिन की देरी से होगी। जाहिर है कि बैतूल सहित सभी जिलों में पर इसका असर होगा। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि बैतूल सहित अन्य जिलों में इस बार 20 जून के बाद ही मानसून सक्रिय हो सकेगा।
केवल इन जिलों में अधिक बारिश
मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन, सागर और चंबल संभाग के केवल 8 जिलों में सामान्य बारिश होने की उम्मीद जताई है, जबकि अधिकांश जिलों में बारिश औसत से कम रह सकती है। प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, नीमच, दमोह, अनूपपुर, उज्जैन, आलीराजपुर और बड़वानी में सामान्य या इससे ज्यादा पानी गिर सकता है। वहीं अन्य सभी जिलों में कम बारिश होगी।
जून में कमजोर, जुलाई में बेहतर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार जून माह में बहुत ज्यादा बारिश की उम्मीद नहीं की जा सकती है। जून में बारिश कमजोर रहने के आसार हैं। हालांकि इसके बाद जुलाई में मानसून कुछ बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इससे जून की बाकी रह गई कसर के पूरी होने की संभावना है।
जिले में हो चुकी हाल ही में बारिश
अभी मानसून भले ही नहीं आया है, लेकिन नौतपा के पहले ही दिन जिले के कई क्षेत्रों में बारिश हुई थी। इसके अलावा प्रदेश में भी कई स्थानों पर बारिश हो चुकी है। शुक्रवार को भी ग्वालियर, मुरैना समेत कई जिलों में बारिश हुई। जिलेवासी हालांकि इस साल अच्छी बारिश की आस लगाए हुए हैं। वहीं जल्द मानसून सक्रिय होने की उम्मीद भी कर रहे हैं क्योंकि जिले के कई क्षेत्रों में गंभीर जल संकट से लोग जूझ रहे हैं।
अच्छी बारिश से बेहतर हुआ उत्पादन
जिले में वर्ष 2025 में सामान्य से लगभग 6 इंच (151.9 मिलीमीटर) अधिक बारिश दर्ज की गई थी। यहां की औसत वर्षा 1083.9 मिमी है, जबकि 2025 में यहां 1235.8 मिमी से ज्यादा बारिश हुई, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक थी। अच्छी बारिश का असर फसल उत्पादन पर भी देखा गया। यहां गेहूं सहित अन्य फसलों का बेहतर उत्पादन हुआ। समर्थन मूल्य पर पर इस साल 57 हजार मेट्रिक टन से ज्यादा गेहूं बेचा गया, जबकि लक्ष्य मात्र 40 हजार मेट्रिक टन का था। बीते साल केवल 26 हजार मेट्रिक टन की खरीदी ही हो सकी थी। जबकि इस साल 6 हजार से ज्यादा किसान गेहूं ही नहीं बेच पाए।
अल-नीनो के प्रभाव से कम बारिश
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर मानसून के पीछे अल-नीनो प्रभाव प्रमुख वजह हो सकता है। इसके असर से मानसूनी हवाओं की रफ्तार और बारिश का पैटर्न प्रभावित होता है। कम बारिश की स्थिति में आने वाले सीजन में जिले में फसलों के उत्पादन के साथ पेयजल और सिंचाई संकट गहराने की भी आशंका है। मौसम विभाग का कहना है कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है।
बारिश पर कैसे असर डालता अल नीनो
मौसम के जानकारों के अनुसार अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनिया भर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलधार बारिश और बाढ़ आती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब वह प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा।

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