Maternal Death Investigation: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। सरकार सुरक्षित प्रसव करवाने कई योजनाएं चलाकर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि अस्पताल में सुरक्षित प्रसव हो और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। इसके बावजूद आए दिन प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आते हैं। इन मौतों को जिले का स्वास्थ्य महकमा और स्वास्थ्य अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते हैं, इसका खुलासा ९ दिन पूर्व मुलताई अस्पताल में प्रसव होने के मात्र ४ घंटे बाद हुई एक प्रसूता की मौत के बाद हुआ है। प्रसूता की मौत के बाद परिजनों द्वारा मृतिका का शव कलेक्ट्र्रेट ले जाकर शिकायत करने के बाद सीएमएचओ द्वारा आनन-फानन में तीन सदस्यीय जांच दल तो बना दिया गया, लेकिन प्रसूता की मौत के ९ दिन बाद भी इस मामले की जांच ही शुरू नहीं हो पाई। जांच टीम में शामिल महिला रोग विशेषज्ञ के छुट्टी पर जाने से अभी तक इस मामले में जांच ही शुरू नहीं हो पाई है, जबकि परिजनों ने मुलताई अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा भी प्रसूता की मौत के बाद बिना पोस्टमार्टम करवाएं शव परिजनों को सौंप दिया गया था। 

ज्ञात हो कि मुलताई क्षेत्र के ग्राम पारसठानी निवासी प्रसूता रोशनी बुवाड़े पति कमलनाथ बुवाड़े (२८) का प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई में विगत १९ मई को सुबह ७ बजे हुआ था। सामान्य प्रसव होने के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ्य थे, लेकिन प्रसव के लगभग आधा घंटे बाद रोशनी को ब्लडिंग शुरू हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया था कि अत्यधिक ब्लडिंग होने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने दो घंटे तक मुलताई अस्पताल में उपचार किया। वहीं इस दौरान कोई डॉक्टर भी नहीं आया। लगभग दो घंटे बाद सुबह लगभग १० बजे रोशनी को जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने के पूर्व ही प्रसूता की मौत हो गई थी। 

कलेक्टर से की थी शिकायत

जिला अस्पताल में प्रसूता को मृत घोषित करने के बाद बिना पोस्टमार्टम करवाए शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुलताई अस्पताल के डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। कलेक्टर के निर्देश पर शव को वापस जिला अस्पताल भिजवा कर दो डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम करवाया गया। सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े ने भी गंभीरता दिखाते हुए प्रसूता की मौत की जांच करने तीन सदस्यीय जांच टीम बना दी। जिसमें जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश परिहार, जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. रानू वर्मा और महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा डेनियल को शामिल किया गया।

9 दिन बाद भी शुरू नहीं हुई जांच

इस संवेदनशील मामले में जांच टीम द्वारा प्रसूता की मौत के ९ दिन बाद भी जांच ही शुरू नहीं की गई। जांच टीम में शामिल डीएमओ डॉ. राजेश परिहार से जब प्रसूता की मौत की जांच के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जांच टीम में शामिल महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा डेनियल छुट्टी पर हैं। उनके आने के बाद ही जांच शुरू की जाएगी। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य महकमा प्रसूता की मौत के मामले में कितना गंभीर है। मृतिका के परिजनों ने इस मामले में शीघ्र जांच करवाने की मांग की है।