कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, कांग्रेस नेता के बयान से बढ़ी हलचल
बेंगलुरु।दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य कर्नाटक के सियासी गलियारों में इस समय अभूतपूर्व हलचल देखी जा रही है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता की कमान बदलने की कयासबाजियों के बीच देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस के वरिष्ठतम विधायक आरवी देशपांडे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। देशपांडे ने दावा किया है कि सूबे के मुखिया सिद्धारमैया ने स्वयं उनके साथ अपनी आंतरिक भावनाएं साझा की हैं। देशपांडे के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनसे स्पष्ट कहा है कि वे अब अपने पद का परित्याग करने (इस्तीफा देने) का पूरा मन बना चुके हैं।
शिवकुमार के समर्थकों ने फोड़े पटाखे, मिठाइयों के साथ मनाया जश्न
जैसे ही देशपांडे का यह बयान राजनीतिक गलियारों में फैला, वैसे ही उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के धड़े में जबरदस्त उत्साह देखा गया। बेंगलुरु के सदाशिवनगर और रामनगर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिवकुमार के प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर आतिशबाजी शुरू कर दी और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। समर्थकों का तर्क है कि शिवकुमार एक कद्दावर और रणनीतिक नेता हैं, जिन्होंने साल 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार बनवाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी गुरुवार को सिद्धारमैया राजभवन जाकर महामहिम राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप सकते हैं, जिसके तत्काल बाद डीके शिवकुमार राज्य के नए कैप्टन के रूप में शपथ ले सकते हैं।
पिछड़ा वर्ग महासंघ की कांग्रेस हाईकमान को दोटूक: 'हटाया तो कल से होगा आंदोलन'
हालांकि, सिद्धारमैया को कुर्सी से बेदखल करने की इन कोशिशों पर राज्य के प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग महासंघ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। महासंघ ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधे तौर पर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए विवश किया गया, तो पार्टी को आगामी चुनावों में इसके बेहद विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे। महासंघ के पदाधिकारियों का तर्क है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता वापसी सिर्फ और सिर्फ पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों (अहिंदा समीकरण) के मजबूत वोट बैंक के कारण ही संभव हो पाई है। संगठन के अध्यक्ष रामचंद्रप्पा ने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में समूचे सूबे में सिद्धारमैया के कद और प्रभाव का दूसरा कोई बड़ा ओबीसी चेहरा कांग्रेस के पास नहीं है। उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि यदि मुख्यमंत्री को हटाया गया, तो वे कल सुबह से ही राज्यव्यापी उग्र प्रदर्शन और आंदोलन का बिगुल फूंक देंगे।
दिल्ली से मिला राज्यसभा और राष्ट्रीय भूमिका का ऑफर, गुरुवार को अहम बैठक
अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान (हाईकमान) ने गतिरोध को शांत करने के लिए सिद्धारमैया के सामने दिल्ली की राजनीति में एक बड़ी सम्मानजनक भूमिका और संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, मौजूदा मुख्यमंत्री ने इस केंद्रीय ऑफर पर तुरंत अपनी सहमति नहीं दी है। इस बीच, सिद्धारमैया ने गुरुवार सुबह अपने सरकारी बंगले पर कैबिनेट मंत्रियों और अपने खास विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' (नाश्ते पर बैठक) आमंत्रित की है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि इस अहम बैठक के समापन के बाद ही कर्नाटक की सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसकी अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

निवाड़ी में विकास का नया अध्याय आरंभ हो रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Stray Cattle on Roads: बैतूल की सड़कों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, राजगढ़ हादसे ने दी चेतावनी
Akhil Bharatiya Bhargava Sabha: देशभर के 120 प्रतिनिधियों ने बनाई रणनीति, जयपुर में होगा भार्गव सभा का वार्षिक अधिवेशन