अब एक-एक घुसपैठिए पर कार्रवाई, जस्टिस नावलेकर की अध्यक्षता में बनी हाई लेवल कमेटी
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के चुनावों के बाद, केंद्र सरकार ने देश में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'हाई-पावर कमेटी' का गठन कर दिया गया है। 'हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज' नाम की यह समिति बिना किसी राजनीतिक दबाव के, पूरी तरह वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से घुसपैठियों के नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी।
कमेटी में शामिल हैं देश के बड़े चेहरे
इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को सौंपी गई है। जस्टिस नावलेकर अपनी निष्पक्षता और सख्त कानूनी समझ के लिए जाने जाते हैं। उनके अलावा इस कमेटी में तीन अन्य बड़े नाम शामिल किए गए हैं:
-
दुर्गा शंकर मिश्रा: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी।
-
बालाजी श्रीवास्तव: अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले रिटायर्ड आईपीएस (IPS) अधिकारी।
-
डॉ. शमिका रवि: मशहूर अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य, जो जनसंख्या और सामाजिक डेटा का विश्लेषण करेंगी।
'चोरी-छिपे रहने वालों की उल्टी गिनती शुरू'
गृहमंत्री अमित शाह ने सख्त लहजे में कहा कि जो लोग भारत की सीमाओं में अवैध रूप से घुसकर, यहाँ के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी कागजात (जैसे राशन कार्ड या वोटर आईडी) बनवाकर देश की आबादी का संतुलन बदलने का सपना देख रहे हैं, उनकी उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। सरकार का संकल्प है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले एक-एक घुसपैठिए को चिह्नित कर बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और जनजातीय समाज का संरक्षण
अमित शाह के मुताबिक, अवैध प्रवासियों के कारण हो रहा डेमोग्राफिक चेंज (जनसांख्यिकीय बदलाव) देश की संप्रभुता, कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरा है। यह बदलाव खासकर जनजातीय (आदिवासी) समाज के अधिकारों और उनके संरक्षण को प्रभावित कर रहा है। यह कमेटी देश भर में अवैध प्रवास के कारणों और उसके प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन करेगी।
इन इलाकों पर रहेगा विशेष ध्यान
सरकार ने साफ कर दिया है कि विदेशी घुसपैठियों के दम पर देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को बदलने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी। कमेटी का मुख्य ध्यान उन इलाकों पर रहेगा जहाँ आबादी का संतुलन असामान्य रूप से बिगड़ा है। इनमें असम के आदिवासी इलाके और झारखंड का संथाल परगना विशेष रूप से शामिल हैं, जहाँ आने वाले दिनों में सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है।

Madhya Pradesh Bus Strike: 7 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम, नहीं मानी मांगें तो थम जाएंगे बसों के पहिए
Betul Land Encroachment: सरकारी जमीन पर कब्जे का बड़ा खेल, जांच में सामने आए 27 अतिक्रमण
Outsource Employees Salary: सीएमएचओ कार्यालय पर गंभीर आरोप, सफाईकर्मियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को नहीं मिल रहा पूरा वेतन
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत