मन्नत पूरी होने पर इस मंदिर में चढ़ती है हरी लौकी तो कहीं भगवान पी जाते हैं शराब, भारत के 5 सबसे अनोखे मंदिर
भारत में मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि लोक आस्था, परंपरा और अनोखी मान्यताओं का जीवंत रूप भी हैं. यहां हर राज्य, हर क्षेत्र और हर मंदिर की अपनी अलग कहानी है. आमतौर पर मंदिरों में भक्त मिठाई, फल, नारियल या फूल चढ़ाते हैं, लेकिन देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां प्रसाद के रूप में ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जिन्हें सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. कहीं भगवान को शराब चढ़ाई जाती है, कहीं लकड़ी के खिलौने, तो कहीं भक्त चूहों का झूठा प्रसाद तक ग्रहण करते हैं. इन परंपराओं के पीछे सदियों पुरानी मान्यताएं और स्थानीय विश्वास जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि ये मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोगों की जिज्ञासा और आस्था का बड़ा केंद्र भी बन चुके हैं.
राजस्थान का वो मंदिर जहां चूहे हैं सबसे खास करणी माता मंदिर की अनोखी मान्यता राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित करणी माता मंदिर दुनियाभर में अपने हजारों चूहों की वजह से प्रसिद्ध है. इस मंदिर में करीब 20 हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं, जिन्हें यहां “काबा” कहा जाता है. हैरानी की बात यह है कि भक्त इन्हें देवी का रूप मानते हैं और इनके खाए हुए भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण भी करते हैं. मंदिर में आने वाले कई श्रद्धालु बताते हैं कि यहां सफेद चूहा दिखना बेहद शुभ माना जाता है. विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी परंपरा को देखने खास तौर पर यहां पहुंचते हैं. पहली बार आने वाले लोगों को यह दृश्य अजीब जरूर लगता है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह गहरी आस्था का विषय है.
उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है अलग भगवान को चढ़ती है मदिरा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर की परंपरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है. यहां भगवान भैरव को प्रसाद के रूप में शराब अर्पित की जाती है. पुजारी जब प्याले को मूर्ति के मुख से लगाते हैं तो कुछ ही सेकंड में वह खाली हो जाता है. यही वजह है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में रहस्य और जिज्ञासा दोनों बनी रहती हैं. कई श्रद्धालु मानते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है. त्योहारों और खास दिनों में मंदिर के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. स्थानीय दुकानों पर पूजा सामग्री के साथ शराब की बोतलें बिकती नजर आना यहां आम बात है.
केरल का मंदिर जहां अनोखा है उत्सव अपशब्द बोलने की भी है परंपरा केरल का कोडुंगलूर भगवती मंदिर अपनी अलग तरह की धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां आयोजित होने वाले ‘भारणी उत्सव’ में भक्त देवी को लाल कपड़े और हल्दी अर्पित करते हैं. सबसे अनोखी बात यह है कि इस दौरान कुछ विशेष अनुष्ठानों में अपशब्द बोलने की परंपरा भी निभाई जाती है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सदियों पुरानी परंपरा बुरी शक्तियों को दूर करने का प्रतीक है. बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह परंपरा चौंकाने वाली हो सकती है, लेकिन यहां इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है.
जब प्रसाद में चढ़ाई जाती है लौकी छत्तीसगढ़ के शाटन देवी मंदिर की मान्यता छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित शाटन देवी मंदिर में भक्त मिठाई की जगह हरी लौकी और तेंदू की लकड़ियां चढ़ाते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चों की रक्षा होती है और परिवार पर देवी की कृपा बनी रहती है. गांवों से आने वाले लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद यहां विशेष पूजा करवाते हैं. मंदिर के बाहर लौकी बेचने वाली दुकानों की लंबी लाइनें भी इस परंपरा की खास पहचान बन चुकी हैं.
खिलौने और बंदूकें भी बन गए प्रसाद आंध्र प्रदेश के मंदिर की अलग परंपरा आंध्र प्रदेश के कामवरम स्थित वीरभद्र स्वामी मंदिर में बच्चों की अच्छी सेहत के लिए मन्नत मांगी जाती है. मनोकामना पूरी होने पर भक्त लकड़ी के खिलौने और खिलौना बंदूकें चढ़ाते हैं. स्थानीय परिवारों का मानना है कि इससे बच्चों को नकारात्मक शक्तियों से बचाव मिलता है. यही वजह है कि यहां छोटे-छोटे खिलौनों से सजी दुकानें हमेशा दिखाई देती हैं.

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