यात्रियों की जेब पर बढ़ सकता है बोझ, परिवहन महासंघ ने सरकार से की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रोजाना बसों से सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों की जेब पर बहुत जल्द भारी बोझ पड़ने वाला है। ईंधन की आसमान छूती कीमतों से परेशान होकर राज्य यातायात महासंघ ने परिवहन विभाग से बस किरायों में तुरंत बढ़ोतरी करने की गुहार लगाई है। ट्रांसपोर्टर्स का तर्क है कि प्रदेश में आखिरी बार वर्ष 2021 में यात्री बसों का भाड़ा संशोधित किया गया था, जिसके बाद से अब तक परिचालन लागत काफी बढ़ चुकी है। महासंघ ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है कि साधारण (ऑर्डिनरी) बसों के किराए में 50 फीसदी और आरामदायक (डीलक्स) बसों के किराए में 30 फीसदी का इजाफा तुरंत किया जाए।
महज 11 दिनों में ₹7 तक भड़के ईंधन के दाम
पिछले करीब डेढ़ हफ्ते (11 दिन) के भीतर देश सहित राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7 रुपये प्रति लीटर का बड़ा उछाल आया है। इस बढ़ोतरी का असर छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में भी साफ दिखने लगा है, जहां अधिकांश जिलों में पेट्रोल की कीमत ₹109 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में आई गिरावट का यह सीधा और कड़वा असर अब आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है।
मालभाड़ा बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ा; सब्जियां और राशन हुए महंगे
ईंधन महंगा होने के तुरंत बाद ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी कमर्शियल गाड़ियों और ट्रकों का मालभाड़ा (लोडिंग चार्ज) बढ़ा दिया है। इसका सीधा और तात्कालिक असर रोजमर्रा के राशन, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों पर दिखने लगा है। मंडियों में आवक की लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुएं और अधिक महंगी होने के आसार हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस नए महंगाई चक्र के कारण एक मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक घरेलू खर्च कम से कम ₹1000 तक बढ़ जाएगा।
सुबह की चाय से लेकर सफर तक सब कुछ हुआ महंगा
महंगाई की यह मार केवल पेट्रोल या सब्जियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सुबह की चाय और रोज का सफर भी महंगा हो गया है। देश की दिग्गज डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनियों ने दलील दी है कि पशुचारे, पैकेजिंग मटेरियल और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
इसके साथ ही, वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (CNG) गैस की दरें भी बढ़कर 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई हैं। सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद अब शहरों के भीतर चलने वाले ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और कैब-टैक्सी के किरायों में भी भारी उछाल आने की पूरी आशंका है, जिससे स्थानीय यात्रियों की मुसीबतें और बढ़ेंगी।

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