1860 में लागू हुआ भारत का पहला इनकम टैक्स, वजह बनी थी 1857 की क्रांति
नई दिल्ली: आज के समय में इनकम टैक्स भारत सरकार के राजस्व (कमाई) का मुख्य जरिया बन चुका है, जिससे देश के विकास कार्यों को गति मिलती है। लेकिन भारत में टैक्स की शुरुआत किसी आर्थिक तरक्की की योजना के तहत नहीं हुई थी, बल्कि ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सरकारी खजाने को कंगाली से बचाने के लिए की गई थी। इसके पीछे एक बड़ा ऐतिहासिक कारण छिपा हुआ है।
1857 के विद्रोह के आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए लगा टैक्स
भारत में इनकम टैक्स की शुरुआत साल 1860 में ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी। इसका मुख्य कारण 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (विद्रोह) था। इस बड़े जन-विद्रोह को कुचलने के लिए अंग्रेजों को पानी की तरह पैसा बहाना पड़ा था। सेना, हथियार और प्रशासनिक व्यवस्था पर हुए भारी खर्च के कारण ब्रिटिश सरकार का खजाना पूरी तरह खाली हो गया था। उस समय सरकार का सालाना राजस्व करीब 30-35 करोड़ रुपये था, जबकि विद्रोह को दबाने का खर्च ही 40 करोड़ रुपये (लगभग 4 करोड़ पाउंड स्टर्लिंग) के पार निकल गया था। इस बड़े घाटे को पूरा करने के लिए ही टैक्स का सहारा लिया गया।
जेम्स विल्सन ने पेश किया था देश का पहला बजट और टैक्स प्रस्ताव
ब्रिटिश सरकार ने इस गंभीर आर्थिक संकट से निपटने के लिए स्कॉटलैंड के जाने-माने अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन को भारत भेजा था, जिन्हें भारत का पहला वित्त सदस्य भी कहा जाता है। जेम्स विल्सन ने ही साल 1860 में देश का पहला बजट पेश किया और इसी दौरान भारत में पहली बार इनकम टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में इस टैक्स का ढांचा बेहद सीमित था और इसे केवल अमीर व उच्च आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
मात्र 2% से हुई थी शुरुआत, 200 रुपये सालाना कमाने वाले आते थे दायरे में
साल 1860 के नियमों के मुताबिक, उस दौर में जिन लोगों की सालाना कमाई 200 रुपये से 500 रुपये के बीच थी, उन पर 2 फीसदी टैक्स लगाया गया था। वहीं, 500 रुपये से अधिक की वार्षिक कमाई करने वालों को 4 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। हालांकि आज के समय में यह रकम बेहद मामूली लगती है, लेकिन उस जमाने में 200 रुपये की सालाना आय बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। यही वजह थी कि आम किसान और मजदूर इसके दायरे से पूरी तरह बाहर थे और यह केवल बड़े व्यापारियों व पेशेवरों पर ही लागू होता था।
अस्थायी शुरुआत से लेकर आधुनिक आयकर अधिनियम 1961 का सफर
शुरुआत में ब्रिटिश सरकार ने इसे एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया था और 1865 में इसे हटा भी दिया गया था। लेकिन बाद में राजस्व जुटाने के इस प्रभावी तरीके को देखते हुए 1886 में एक नया आयकर अधिनियम लाया गया। आजादी के बाद भारतीय टैक्स व्यवस्था में कई बड़े सुधार किए गए और आखिरकार साल 1961 में नया 'आयकर अधिनियम' (Income Tax Act, 1961) लागू किया गया। यही कानून आज भी हमारे देश की टैक्स व्यवस्था का मुख्य आधार है, जिसमें समय-समय पर जरूरी बदलाव किए जाते रहते हैं।

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