RBI की नीति पर असर संभव, नितिन कामत ने जताई ब्याज दर बढ़ने की आशंका
बेंगलुरु। देश की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नितिन कामत ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि यदि देश में कमजोर मानसून के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत को इस साल भीषण महंगाई के दौर से गुजरना पड़ सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात साझा करते हुए जीरोधा के फाउंडर ने साल 2026 को 'चौतरफा संकट' वाला समय बताया है। उनका मानना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मजबूरन अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करना पड़ेगा, जिससे विकास दर प्रभावित हो सकती है।
अल नीनो का साया: खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा
नितिन कामत ने अल नीनो (El Nino) के प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से 6% कम बारिश होने का अनुमान जताया है। हालांकि यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन भारत की करीब 70% वार्षिक बारिश मानसून के दौरान ही होती है और देश के लगभग 60% किसान आज भी सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर हैं। इतिहास का हवाला देते हुए कामत ने कहा कि साल 1951 के बाद से जब भी अल नीनो सक्रिय हुआ, उनमें से 60% मौकों पर सूखा या बेहद कम बारिश दर्ज की गई। साल 2009 में तो 37 वर्षों का सबसे कमजोर मानसून देखा गया था। कम बारिश से चावल, दालें, चीनी और सब्जियों की पैदावार घटने से खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
कमजोर मानसून के अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहा भू-राजनीतिक तनाव भी भारत की मुश्किलें बढ़ा रहा है। नितिन कामत के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी शिपिंग रूट को बाधित कर दिया है। इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और इतनी ही एलएनजी (LNG) गुजरती है। भारत अपनी जरूरत का 80 से 90 प्रतिशत क्रूड ऑयल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक बाजार में अप्रैल के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट का दाम 114 डॉलर और मई में 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना देश के लिए एक बड़ा खतरा है। इससे माल ढुलाई, पेट्रोल-डीजल और खाद की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे चालू खाते का घाटा (CAD) भी अनियंत्रित हो सकता है।
आरबीआई के सामने होगी 'अग्निपरीक्षा', बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
आर्थिक विशेषज्ञों और नितिन कामत का मानना है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और कच्चे तेल का महंगा होना रिजर्व बैंक (RBI) के लिए सबसे पेचीदा स्थिति पैदा कर देता है। एक तरफ जहां इससे देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, वहीं दूसरी तरफ खुदरा महंगाई दर तेजी से ऊपर भागती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता और महंगाई को काबू में करने के लिए उसे एक सीमा के बाद लोन की ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी करनी ही पड़ेगी। ब्याज दरें बढ़ने से कॉरपोरेट और आम आदमी के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा, जिससे यह वित्तीय संकट और गहरा सकता है।

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